विषय – ज्ञान
दिनाँक – १४/१०/१९

संसार पर यह अशान्ति क्यों
जीवन में दुःशान्ति
क्यों छा रही है ?

आग में भी आग लगी क्यों
पानी भी पानी में
क्यों डूबती जा रही है

धरा पर पाप बढ़ा क्यों
पुण्य का फल भी कम
क्यों हुए जा रही है

सूर्य का तेज भी
चाँद की रौशनी भी कम
क्यूँ इन चेहरों से हुए जा रही हैं

एक ही है कारण
जो है मूढ़ वो ज्ञानी बनते फिरे
मूर्खों की बस्ती से घीरे रहे

अज्ञानी ज्ञान को हरते रहे
ज्ञानी दर दर भटकता फिरे
ज्ञानी घिरे हैं हर तरफ सन्देह में
मूर्ख की ललकार वे सहते रहे

अज्ञान जोर से बोलता रहा
ज्ञानी की धीमी आवाज
कौन सुनता फिरे

कहत सिया से राम
एक दिन ऐसा आएगा,
मोती भोग लगेगा कौवा को,
हँस दाना को पछताएगा।

अश्विनी राय ‘अरूण’

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