सफ़ेद कमीज़, तिरंगा हाथ में, वो सुबह निराली होती थी, अश्विनी! तब देश की...
कविता
मौलिक हिंदी कविताओं का विशाल संग्रह: सामाजिक, आध्यात्मिक और विचारोत्तेजक
“हमारे ‘कविता’ अनुभाग में आपका स्वागत है! यहाँ आपको विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण द्वारा रचित सभी मौलिक हिंदी कविताएँ मिलेंगी। इस संग्रह में ‘मोबाइल का नशा’ और ‘मानवता के द्रोही’ जैसी महत्वपूर्ण रचनाएँ शामिल हैं, जो सामाजिक समस्याओं, पर्यावरण संरक्षण और जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डालती हैं। हिंदी कविता के इस अद्भुत संसार में गोता लगाएँ।”
विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण कहते हैं, ‘कुछ ना कहकर सब कुछ कह जाने की कला ही कविता है’
हाथों की गंदगी छिप जाए, इसलिए पहने हैं ‘दस्ताने’, अपनी फितरत बदल न सके,...
सवर्ण – अपनी ही ज़मीन पर शरणार्थी? राष्ट्रवाद का झोला टांगे, मैं सवर्ण...
अहिल्याबाई होलकर जी ने जिन खंडहरों को पुनर्जीवित किया था, उन्हें आज ‘पुनरुद्धार’ के...
॥ मकर संक्रांति: सांस्कृतिक एकात्मकता का पर्व ॥ तिल-गुड़ की मिठास और पतंगों...
॥ राम भारत के पूर्णत्व ॥ उत्तर की ऊँची चोटी से, दक्षिण के...
सज गई मेज़ और सज गई थाली, हवा में महक है बड़ी निराली! आज...
गीत: श्रद्धा का संवाद (स्थायी) ए पुजारी रे! काहे को तू पूजा करत है?...
कहीं शहद सी घुलती मिश्री, कहीं वीरता की हुंकार है, मेरे बिहार की...
सात समंदर पार गूँजती, मॉरीशस से सूरीनाम तक, भोजपुरी की गंध महकती, सुबह से...