अब स्याही की ज़रूरत क्या, जब चिप में सारा ज्ञान है? लेखक की उस...
कविता
मौलिक हिंदी कविताओं का विशाल संग्रह: सामाजिक, आध्यात्मिक और विचारोत्तेजक
“हमारे ‘कविता’ अनुभाग में आपका स्वागत है! यहाँ आपको विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण द्वारा रचित सभी मौलिक हिंदी कविताएँ मिलेंगी। इस संग्रह में ‘मोबाइल का नशा’ और ‘मानवता के द्रोही’ जैसी महत्वपूर्ण रचनाएँ शामिल हैं, जो सामाजिक समस्याओं, पर्यावरण संरक्षण और जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डालती हैं। हिंदी कविता के इस अद्भुत संसार में गोता लगाएँ।”
विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण कहते हैं, ‘कुछ ना कहकर सब कुछ कह जाने की कला ही कविता है’
दो आँखों से देखा हमने, बस दुनिया का मेला है, छल, कपट और भीड़...
सन्नाटा है रात का, पर रौशन घर का कोना है, नींदों को कुछ दिन...
पास बैठे हैं सब, पर कोई पास नहीं, धड़कनों में अब पहले जैसी प्यास...
वो भी क्या मुसाफ़िरी, जो बस मंज़िल तक पहुँचा दे, मज़ा तो उस रास्ते...
भय प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी, बक्सर की इस पावन रज पर, छटा अलौकिक...
जली जो लकड़ियाँ बाहर, क्या भीतर कुछ खाक हुआ? मिटा जो चेहरे का अंतर,...
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर, भगवान शिव की महिमा को समर्पित विशेष रचना प्रस्तुत...
सफ़ेद कमीज़, तिरंगा हाथ में, वो सुबह निराली होती थी, अश्विनी! तब देश की...
हाथों की गंदगी छिप जाए, इसलिए पहने हैं ‘दस्ताने’, अपनी फितरत बदल न सके,...