फ़िल्म समीक्षा: ‘दिल की रानी’ (१९४७) — स्वाभिमान, कला-साधना और हल्की-फुल्की हास्य-रोमांस गाथा ...
फिल्म समीक्षा
नवीनतम हिंदी फिल्मों की गहन समीक्षा और विशेषज्ञ आलोचना
“हमारे ‘फिल्म समीक्षा’ अनुभाग में नवीनतम बॉलीवुड, हॉलीवुड रिलीज़ और क्षेत्रीय सिनेमा पर विशेषज्ञ राय प्राप्त करें। विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण की टीम द्वारा प्रस्तुत, ये समीक्षाएँ (Reviews) आपको फिल्म देखने से पहले उसकी कहानी, निर्देशन और सामाजिक प्रासंगिकता (relevance) को समझने में मदद करेंगी। हर नई फिल्म रिलीज का अपडेट और विस्तृत आलोचना यहाँ प्राप्त करें।”
फ़िल्म समीक्षा: ‘नील कमल’ (१९४७) — पौराणिक पृष्ठभूमि, नियति का द्वंद्व और राज कपूर-मधुबाला...
फ़िल्म समीक्षा: ‘इंकलाब’ (१९३५) — ब्रिटिश काल का सामाजिक संदेश और न्यू थिएटर्स का...
फ़िल्म समीक्षा: ‘आवारा’ (१९५१) — वर्ग-भेद पर करारा प्रहार और ‘आवारा’ के मसीहा की...
फिल्म समीक्षा: ‘सतलुज’ (पंजाब ’95) – इतिहास, सिनेमा और तटस्थता का द्वंद्व निर्देशक:...
भारतीय सिनेमा का शंखनाद: ३ मई १९१३ और पहली मूक फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ ...
फिल्म समीक्षा: ४०४ एरर नॉट फाउंड (404 Error Not Found) परिचय और सारांश...
‘मिलन’ (1946): गुरुदेव की ‘नौका डूबी’ का पहला हिंदी रूपहला पन्ना और एक ऐतिहासिक...
सुरों का द्वंद्व और आदर्शों का अवसान: ऋषिकेश मुखर्जी की ‘आलाप’ का संपूर्ण और...
मनोज कुमार द्वारा निर्देशित और अभिनीत ‘रोटी कपड़ा और मकान’ (१९७४) भारतीय सिनेमा की...