June 24, 2024

आज हम बात करने वाले हैं, भारत के प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक, उपन्यासकार और इतिहासकार खुशवंत सिंह जी के बारे में, जिन्होंने पत्रकार के रूप में बहुत लोकप्रियता प्राप्त की तथा ‘भारत सरकार’ के ‘विदेश मन्त्रालय’ में विदेश सेवा के सम्माननीय पद पर भी उन्होंने कार्य किया था। सिर्फ इतना ही नहीं वर्ष २००० में उन्हें ‘वर्ष का ईमानदार व्यक्ति’ सम्मान से सम्मानित किया गया था। अब विस्तार से…

परिचय…

खुशवंत सिंह जी का जन्म २ फ़रवरी, १९१५ को पंजाब के ‘हदाली’ (अब पाकिस्तान में) नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता जी का नाम सर सोभा सिंह था, जो अपने समय के प्रसिद्ध ठेकेदार थे। उस दिनों सोभा सिंह जी को आधी दिल्ली का मालिक कहा जाता था। खुशवंत सिंह जी ने ‘गवर्नमेंट कॉलेज’, लाहौर और ‘कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी’ में शिक्षा पाई थी। इसके बाद लंदन से ही क़ानून की डिग्री हासिल करने के बाद लाहौर में वकालत करने लगे। खुशवंत सिंह जी का विवाह कवल मलिक के साथ हुआ, जिनसे उन्हें एक पुत्र राहुल सिंह एवम एक पुत्री माला का जन्म हुआ।

पत्रकार…

खुसवंत जी एक कुशल पत्रकार थे और पत्रकारिता में बहुत ख्याति अर्जित की। वर्ष १९५१ में वे आकाशवाणी से संबद्ध थे और फिर वर्ष १९५१ से वर्ष १९५३ तक भारत सरकार के पत्र ‘योजना’ का संपादन किया। उसके बाद वर्ष १९८० तक वे मुंबई से प्रकाशित प्रसिद्ध अंग्रेज़ी साप्ताहिक ‘इल्लस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया’ के और ‘न्यू डेल्ही’ के संपादक रहे। वर्ष १९८३ तक वे दिल्ली के प्रमुख अंग्रेज़ी दैनिक ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के संपादक रहे। तभी से वे प्रति सप्ताह एक लोकप्रिय ‘कॉलम’ लिखते रहे, जो अनेक भाषाओं के दैनिक पत्रों में प्रकाशित होता है/था।

उच्च पदों पर कार्य…

वर्ष १९४७ से कुछ वर्षों तक खुशवंत सिंह जी ने भारत के विदेश मंत्रालय में विदेश सेवा के महत्त्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया। वर्ष १९८० से १९८६ तक वे राज्य सभा के मनोनीत सदस्य भी रहे थे।

लेखन…

खुशवंत सिंह जी के बारे में सही तौर पर कहा जाए तो वे कथाकार हैं। उपन्यास एवं कहानियों के क्षेत्र में उनका योगदान उनके लेखन में प्राथमिक महत्व का है। परंतु, इसके अतिरिक्त व्यंग्य-विनोद-मिश्रित विचारपरक एवं इतिहास के क्षेत्र में भी उनका योगदान कम महत्वपूर्ण नहीं है। संस्मरण एवं आत्मकथा लिख कर उन्होंने प्रसिद्धि प्राप्त की है। वर्तमान संदर्भों और प्राकृतिक वातावरण पर भी उनकी कई रचनाएँ हैं। दो खंडों में प्रकाशित ‘सिक्खों का इतिहास’ उनकी प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति है। हालाँकि इस इतिहास में अभिव्यक्त कुछ तथ्यों की प्रामाणिकता पर संदेह भी व्यक्त किया गया है। साहित्य के क्षेत्र में पिछले सत्तर वर्ष में खुशवन्त सिंह का विविध आयामी योगदान महत्त्वपूर्ण रहा है।

प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें…

(हिन्दी में अनूदित)

उपन्यास : दिल्ली, पाकिस्तान मेल, औरतें, सनसेट क्लब, टाइगर टाइगर, बोलेगी न बुलबुल अब आदि।

कहानी : प्रतिनिधि कहानियाँ, खुशवंत सिंह की सम्पूर्ण कहानियाँ आदि।

आत्मकथा/संस्मरण : सच, प्यार और थोड़ी सी शरारत (अनुवाद- निर्मला जैन), मेरे मित्र : कुछ महिलाएँ – कुछ पुरुष, मेरी दुनिया मेरे दोस्त आदि।

इतिहास : सिखों का इतिहास (दो खंडों में, अनुवाद- उषा महाजन)

अन्य : मेरा लहूलुहान पंजाब

सम्मान तथा पुरस्कार…

२० मार्च, २०१४ को नई दिल्ली में ९९ वर्ष की आयु में निधन से पूर्व खुशवंत सिंह को अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए थे, जिनमें से मुख्य हैं…

१. वर्ष २००० में प्राप्त ‘वर्ष का ईमानदार व्यक्ति’ सम्मान।
२. वर्ष १९७४ में राष्ट्रपति द्वारा दिया गया ‘पद्म भूषण’ अलंकरण, जिसे उन्होंने अमृतसर के ‘स्वर्ण मंदिर’ में केन्द्र सरकार की कार्रवाई के विरोध में वर्ष १९८४ में लौटा दिया था। तथा
३. वर्ष २००७ में इन्हें ‘पद्म विभूषण’ से भी सम्मानित किया गया।

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