“पराजय और असफलता कभी-कभी विजय की और जरूरी कदम होते हैं।” शायद लाला जी यह पहले ही जानते थे की आज से कहीं ज्यादा लाचार कल का भारत होगा, असफलता और निराशा का कोई ऐसा दौर भी आएगा जब हर देशवासी दूसरे की नजर में अंग्रेज होगा अर्थात देशद्रोही या विदेशी और खुद की नजर में क्रान्तिकारी। उन्होने आगे कहा, “नेता वह है जिसका नेतृत्व प्रभावशाली हो, जो अपने अनुयायियों से सदैव आगे रहता हो, जो साहसी और निर्भीक हो”।

लाला जी यह बखूबी जानते थे आने वाला भारत सपनों की छांव में खाट बिछाए मुंगेरीलाल के हसीन सपनों में जीएगा। वे यह बात अच्छी तरह जानते थे की, नए भारत के नवयुवक अपने बाप दादाओं के हाथियों के पैकड़ लिए घुमा करेंगे, इसीलिए तो उन्होने यह बात पहले ही कह दिया था, “अतीत को देखते रहना व्यर्थ है, जब तक उस अतीत पर गर्व करने योग्य भविष्य के निर्माण के लिए कार्य न किया जाए”।

लाल-बाल-पाल के नाम से जाने, जाने वाले त्रिमूर्ति के तीन नेताओं में से एक लाला जी ने बाकी दोनो के साथ मिलकर सबसे पहले भारत में पूर्ण स्वतन्त्रता की माँग की थी बाद में समूचा देश इनके साथ हो गया था।

लाला जी ने स्वामी दयानन्द सरस्वती के साथ मिलकर आर्य समाज को पंजाब में लोकप्रिय बनाया। लाला हंसराज के साथ दयानन्द एंग्लो वैदिक विद्यालयों का प्रसार किया, लोग जिन्हें आजकल डीएवी स्कूल्स व कालेज के नाम से भी जानते हैं। लालाजी ने अनेक स्थानों पर अकाल में शिविर लगाकर लोगों की सेवा भी की थी। ३० अक्टूबर १९२८ का वो मनहूस दिन जब इन्होंने लाहौर में साइमन कमीशन के विरुद्ध आयोजित एक विशाल प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जिसके दौरान हुए लाठी-चार्ज में ये बुरी तरह से घायल हो गये। उस समय इन्होंने कहा था, “मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी।” और वही हुआ भी; लालाजी के बलिदान के २० साल के भीतर ही ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य अस्त हो गया।

लाला जी उर्फ लाला लाजपत राय जी का जन्म २८ जनवरी, १८६५ को पंजाब के मोगा जिले में एक अग्रवाल परिवार में हुआ था। वे जैन धर्म के अग्रवंश मे जन्मे एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। इन्हें पंजाब केसरी के नाम से भी जाना जाता है। आज के प्रमुख बैंकों में से एक पंजाब नैशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कम्पनी की स्थापना भी लाला जीने ही की थी।

लाला जी हिन्दी के समर्थक थे, शिवाजी, श्रीकृष्ण आदि जैसे कई महापुरुषों की जीवनियाँ भी उन्होने हिन्दी में लिखीं। देश में और विशेषतः पंजाब में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में बहुत सहयोग दिया। देश में हिन्दी लागू करने के लिये उन्होने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था। गरम दल के प्रमुख नेता श्री लाला लाजपत राय जी ने एक बार कहा था, “पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ शांतिपूर्ण साधनों से उद्देश्य पूरा करने के प्रयास को ही अहिंसा कहते हैं”।

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