राम जेठमलानी: वकालत के ‘जादूगर’ का जीवन और उनके विवादित मुकदमों का कच्चा चिट्ठा
”न्याय की तराजू पर मेधा का भारी होना वकालत का हुनर हो सकता है,
मगर वह समाज की आत्मा के लिए सदैव न्यायसंगत हो, यह अनिवार्य नहीं।”
सुप्रीम कोर्ट के गलियारों से लेकर देश की सबसे बड़ी अदालतों की चौखट तक, एक ऐसा वकील जिसने ७८ सालों तक कानून की धाराओं को अपनी उंगलियों पर नचाया—राम जेठमलानी। रविवार की सुबह ९५ वर्ष की आयु में वे इस नश्वर संसार को छोड़कर चले गए। उम्र के अंतिम पड़ाव पर भी उनकी कुशाग्र याददाश्त, गज़ब का सेंस ऑफ़ ह्यूमर और आक्रामक शैली वैसी ही बनी रही जैसी उनकी युवावस्था में थी। मगर वे जीवन की शतकीय पारी खेलने से वंचित रह गए।
एक पेशेवर जादूगर वकील के रूप में उनकी उपलब्धियाँ कितनी ही बड़ी क्यों न हों, मगर एक संवेदनशील समाज उन्हें हमेशा संदेह और मलाल की दृष्टि से देखता है। कारण साफ़ है—उनके द्वारा लड़े गए मुकदमों की सूची में देश हित, धर्म हित और समाज हित के बजाय रसूखदारों, अपराधियों और माफियाओं के प्रति झुकाव अधिक दिखा। ‘पेशेवर मजबूरी’ की आड़ में भावना-शून्य होकर सिर्फ़ मोटी कमाई और साख को तरजीह देना कहाँ तक उचित है, यह देश के विचारक भली-भांति जानते हैं।
आइए, उनके जीवन, परिवार और उनके सबसे विवादित मुकदमों के वृत्तांत का एक निष्पक्ष परीक्षण करते हैं।
जीवन परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि
राम जेठमलानी का जन्म १४ सितंबर, १९२३ को अविभाजित भारत के सिंध प्रांत के शिकारपुर (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। वे बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे, जिसके कारण उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा बहुत तेज़ी से पूरी की और महज़ १७ वर्ष की आयु में वकालत की डिग्री प्राप्त कर ली।
विधिक अपवाद: उस समय वकालत शुरू करने की न्यूनतम आयु २१ वर्ष थी, परंतु जेठमलानी के लिए एक विशेष प्रस्ताव पारित कर १७ वर्ष की आयु में ही उन्हें अभ्यास करने की अनुमति दी गई।
पारिवारिक जीवन: राम जेठमलानी का पारिवारिक जीवन भी उनके मुकदमों की तरह चर्चा में रहा। उन्होंने दो शादियाँ की थीं। उनकी पहली पत्नी दुर्गा जेठमलानी थीं और दूसरी पत्नी रत्न जेठमलानी। उनके परिवार में दो बेटे (महेश जेठमलानी और जनक जेठमलानी) तथा दो बेटियाँ (रानी जेठमलानी और शोभा जेठमलानी) हुईं। उनके बेटे महेश जेठमलानी और दिवंगत बेटी रानी जेठमलानी ने भी पिता की राह पर चलते हुए वकालत को ही अपना पेशा चुना।
विवादित मुकदमों का साम्राज्य
बीबीसी (BBC) के सहयोग से उनके जीवन के उन १२ सबसे बड़े और विवादित मामलों का परीक्षण यहाँ प्रस्तुत है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया था:
इंदिरा गांधी की हत्या के आरोपियों के वकील: देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या करने वाले आरोपियों (सतवंत सिंह और केहर सिंह) का केस लड़कर उन्होंने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था।
राजीव गांधी की हत्या के आरोपियों के वकील: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों (मुरुगन और अन्य संदेही) की पैरवी के लिए भी जेठमलानी मद्रास हाई कोर्ट में खड़े हुए थे।
अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान के वकील: मुंबई के कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन और स्मगलर हाजी मस्तान को अदालती दांव-पेंच से बचाने की ज़िम्मेदारी भी इन्होंने ही उठाई थी।
जेसिका लाल हत्या कांड में अभियुक्तों के वकील: पूरे देश को झकझोर देने वाले इस मामले में जेठमलानी ने मुख्य आरोपी मनु शर्मा (सिद्धार्थ वशिष्ठ) का केस लड़ा, जिसकी चौतरफा थू-थू हुई थी।
सोहराबुद्दीन हत्या कांड में अमित शाह के वकील: गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में उन्होंने तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह की तरफ से पैरवी की थी।
चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव के वकील: बिहार के ऐतिहासिक चारा घोटाले मामले में राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बचाव के लिए जेठमलानी अदालत में उतरे।
आय से अधिक मामले में जे. जयललिता के वकील: तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के आय से अधिक संपत्ति के मामले में वे उनके मुख्य बचाव पक्ष के वकील थे।
टू-जी (2G) स्पेक्ट्रम मामले में कनिमोई के वकील: देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचार घोटालों में से एक, 2G स्पेक्ट्रम मामले में द्रमुक नेता कनिमोई की पैरवी जेठमलानी ने की थी।
अवैध खनन मामले में बी. एस. येदियुरप्पा के वकील: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा के खिलाफ चल रहे अवैध खनन और भ्रष्टाचार के मामले में वे रक्षक बनकर खड़े हुए।
रामलीला मैदान मामले में बाबा रामदेव के वकील: दिल्ली के रामलीला मैदान में आधी रात को सो रहे निर्दोष लोगों पर हुए पुलिसिया दमन के खिलाफ उन्होंने बाबा रामदेव का पक्ष रखा था।
सेबी मामले में सुब्रत राय सहारा के वकील: सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय और सेबी (SEBI) के बीच चले करोड़ों के वित्तीय विवाद में वे सहारा के मुख्य कानूनी सलाहकार थे।
जोधपुर बलात्कार मामले में आसाराम बापू के वकील: समाज में नैतिक रूप से सबसे ज्यादा घृणा का पात्र बने जोधपुर यौन उत्पीड़न मामले में उन्होंने आसाराम बापू का केस हाथ में लिया था।
कुछ अन्य ऐतिहासिक और चर्चित मुकदमे
बीबीसी वर्णित मामलों से इतर भी कुछ ऐसे मुकदमे रहे, जिन्होंने जेठमलानी को भारत का सबसे महंगा और विवादित वकील बनाया:
के. एम. नानावटी बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र (१९५९): यह जेठमलानी के करियर का टर्निंग पॉइंट था। नेवी कमांडर नानावटी द्वारा अपनी पत्नी के प्रेमी की हत्या के इस ऐतिहासिक मामले में वे अभियोजन पक्ष (प्रोसीक्यूशन) की मदद कर रहे थे। इस केस पर आगे चलकर बॉलीवुड में ‘रुस्तम’ जैसी फ़िल्में भी बनीं।
संसद हमला मामला (२००१): भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले के मुख्य आरोपी मोहम्मद अफ़ज़ल गुरु के परिवार की तरफ से एस. ए. आर. गीलानी के बचाव के लिए भी वे सामने आए थे, जिसे लेकर उनकी राष्ट्रभक्ति पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
हर्षद मेहता स्टॉक मार्केट घोटाला (१९९२): देश के सबसे बड़े शेयर बाज़ार घोटाले के मुख्य सूत्रधार हर्षद मेहता का केस भी जेठमलानी ने ही लड़ा था।
अरविंद केजरीवाल मानहानि मामला: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अरुण जेटली के बीच हुए मानहानि के मुकदमे में वे केजरीवाल के वकील थे, जहाँ फीस के करोड़ों रुपयों को लेकर भी बड़ा विवाद हुआ था।
राजनीतिक सफर: विधि मंत्री से बागी होने तक
वकालत के साथ-साथ जेठमलानी ने राजनीति में भी ऊँचे गोते लगाए। वे मुंबई से लोकसभा सांसद चुने गए और अटल बिहारी वाजपेयी की भाजपा सरकार में देश के केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री भी बने। परंतु, अपनी बेबाक और आक्रामक प्रकृति के कारण वे किसी भी राजनीतिक दल में स्थायी रूप से टिक नहीं पाए। भाजपा से निष्कासन के बाद उन्होंने निर्दलीय और राजद (RJD) के सहयोग से भी राज्यसभा का सफर तय किया।
निष्कर्ष
राम जेठमलानी का अवसान कानून की दुनिया के एक अध्याय का अंत है। इतिहास उन्हें एक ऐसे मेधावी ‘जादूगर’ के रूप में याद रखेगा जिसके तर्क अकाट्य थे, मगर नैतिकता कमज़ोर थी। किसी अक्षम्य अपराधी को सिर्फ मोटी फीस के बदले कानून की बारीकियों का फायदा उठाकर बचा लेना, विधिक रूप से भले ही सही माना जाए, परंतु सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना के तराजू पर ऐसा चरित्र हमेशा ‘भावना-शून्य’ ही कहलाएगा।
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