सन्नाटा है रात का, पर रौशन घर का कोना है, नींदों को कुछ दिन...
(Inspirational Hindi Poetry)
मोबाइल मेरी परछाई नहीं, मेरे कल के काल का अंधेरा है। पीठ पर लादे...
बड़ी चाह थी कि जिंदगी लहरा कर चलती रहे, मगर हादसे ऐसे हुए...