April 4, 2025

आज हम ४ जनवरी, २०१३ को रिलीज हुई एक ऐसे फिल्म के बारे में बात करने वाले हैं, जिसमें अपने वैवाहिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन से ऊब चुके एक विवाहित जोड़ा विवान और सिया एक आकर्षक पुरस्कार जीतने के लालच में, एक ऑनलाइन गेम शो का हिस्सा बनते हैं। शुरू·शुरू में तो उन्हें बहुत मजा आता है, परंतु जब वह गेम खतरनाक होने लगता है, तो उन्हें जिंदा रहने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। 

निर्देशक : अदित्य दत्त

पटकथा : शीर्षक आनंद, शांतनु रे छिब्बर, अभिजीत देशपांडे, जिमी-सेन 

कलाकार : परेश रावल, राजीव खंडेलवाल, टीना देसाई आदि।

कहानी…

फिल्म का नाम है, टेबल नं. २१ जिसकी कहानी शुरुवात होती है एक विवाहित जोड़ी विवान (राजीव खंडेलवाल) और सिया अगस्थी (टीना देसाई) से। इन दोनों ने प्यार में पड़कर किया है, लेकिन विवान के पास नौकरी तो थी, मगर किन्हीं कारणों से चली जाती है, दोनों इस बात से बेहद परेशान हैं कि विवान को किसी तरह नौकरी लग जाए क्योंकि एक अकेली सिया की नौकरी से घर का काम चल नहीं पा रहा है। इसी बीच उन दोनों को अपनी शादी की पहली सालगिरह मनाने का मौका फिजी के एक खूबसूरत आइसलैंड पर मिलता है।

वहीं उसी आइसलैंड पर मिस्टर खान (परेश रावल) इन दोनों को एक गेम के बारे में बताते हैं, जिससे वे २१ करोड़ रूपए जीत सकते हैं। इस गेम में दोनों को सिर्फ ८ सवालों के सही जवाब देने हैं और उससे संबंधित एक टास्क पूरा करना है। जिसे पूरा कर वे २१ करोड़ रूपए जीत सकते हैं। यहीं से शुरू होता है फिल्म में उतार चढ़ाव और सस्पेंस दर सस्पेंस। हर सवाल के बाद एक-एक कर सस्पेंस खुलकर सामने आने लगते हैं। फिल्म का टर्निंग प्वाइंट तब आता है जब सिया एक सवाल का जवाब झूठ देती है।

विशेषता…

टेबल नं. २१ की खासियत यह है कि इसमें आगे क्या होने वाला इसका अंदाज लगाना बेहद मुश्किल है। विवान और सिया जिस परिस्थिति से गुजरते हैं और जो हालत उनकी होती है, वही हालत दर्शकों की भी होती है। उन्हें भी पता नहीं रहता है कि कौन सा प्रश्न और टास्क उनका इंतजार कर रहा है।

थ्रिलर मूवी के नाम पर लेखक और निर्देशक ने कुछ छूट ली है, जो इस फिल्म की खामियां भी हैं, जैसे विवान और सिया का २१ करोड़ रुपये वाले गेम को खेलने के लिए राजी हो जाना। एक बार भी उनके मन में संदेह नहीं उठता कि इतनी आसानी से उन्हें इतनी बड़ी रकम क्यों दी जा रही है?

इस फिल्म में दिखाए गए सिया के कुछ ऐसे राज, जो उसके पति विवान को भी पता नहीं हैं, वह खान को कैसे मालूम रहते हैं? उसने ये सब जानकारी कैसे जुटाई इस बारे में फिल्म में कोई रोशनी नहीं डाली गई है? परंतु ये खामियां इतनी बड़ी नहीं है कि फिल्म देखते समय खलल पैदा करें। इन्हें आराम से इग्नोर किया जा सकता है।

शुरुआत में फिल्म बेहद धीमी चलती है, लेकिन गेम शुरू होते ही रफ्तार बढ़ जाती है और दर्शक पूरी तरह से फिल्म में डूब जाते हैं। फिल्म मात्र तीन किरदारों के इर्दगिर्द घूमती है, लेकिन बोरियत है कि पास नहीं फटकती।

अभिनय…

यह तो सभी जानते हैं कि परेश रावल एक मंझे हुए कलाकर हैं जो कि किसी भी रोल को बखूबी निभा सकते हैं। इस फिल्म में भी मिस्टर खान की भूमिका के साथ उन्होंने कुछ ऐसा ही किया है। डार्क सेड में वे खूब जमे हैं। टीना काफी खूबसूरत, आकर्षक और नेचुरल लगी हैं। राजीव ने एक बेबस इंसान और कॉलेज के बदमाश लड़के दोनों ही किरदार को खूब सुंदर तरीके से निभाया है।

निर्देशन…

आदित्य दत्त आपको फिल्म से बांधे रखेंगे। फिल्म की खासियत है इसका सस्पेंस। जिसे निर्देशक ने अंत तक बनाए रखा है। फिल्म के बीच-बीच के फ्लैशबैक फिल्म में जान डालते हैं और फिल्म को आगे बढ़ने में मदद करते हैं। कलाकारों से आदित्य ने अच्छा काम लिया है। हालांकि फिल्म का अंत जिस तरह से होता है, वह आपको चौंका देगा। आपको फिल्म के अंत हो जाने पर भी यह समझ नहीं आएगा कि मैं किसके साथ खड़ा हूं।

संगीत…

फिल्म में सबसे टची इमोशनल मोमेंट को सबसे ज्यादा इफेक्टिव बनाया है इसके म्यूजिक ने। फिल्म के गाने बेशक कुछ खास नहीं हैं और स्टोरी लाइन में कहीं-कहीं फिट भी नहीं बैठते, परंतु इट्स ओके।

फिल्म क्यों देखें…

आप सस्पेंस से भरपूर थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं तो यह फिल्म आपके लिए है। एक नए थ्रिल का मजा मिलेगा।

फिल्म क्यों ना देखें…

यदि आपको सस्पेंस से भरी फिल्में पसंद नहीं है या फिर रियलिटी गेम शोज पर बेस्ड फिल्में पसंद नहीं है या फिर प्रतिशोध वाली फिल्में पसंद नहीं है तो ये फिल्म आपके लिए है ही नहीं, भाई!

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