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जब रंगीन हुआ भारतीय टेलीविजन: दूरदर्शन का वैश्विक साम्राज्य और तकनीकी क्रांति

​लेखक: विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’

 

​प्रस्तावना: २५ अप्रैल १९८२ का वो ऐतिहासिक सवेरा

​भारतीय टेलीविजन के इतिहास में २५ अप्रैल, १९८२ की तारीख सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। यही वह जादुई दिन था जब दूरदर्शन का राष्ट्रीय प्रसारण श्वेत-श्याम (Black & White) के सीमित दायरे से बाहर निकलकर पहली बार ‘रंगीन’ हुआ था। दूरदर्शन का रंगीन होना सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं था, बल्कि इसने भारतीय मध्यमवर्ग के घरों के दीवानखाने का भूगोल और देखने का नज़रिया हमेशा-हमेशा के लिए बदल दिया। रंगीन पर्दे पर जब पहली बार सतरंगी छटा बिखरी, तो देश का जनमानस मंत्रमुग्ध हो उठा।

 

​परिचय: विश्व का दूसरा सबसे विशाल प्रसारक

​दूरदर्शन भारत का एकमात्र सरकारी दूरदर्शन प्रणाल (चैनल) है, जो भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन ‘प्रसार भारती’ के अंतर्गत स्वायत्त रूप से संचालित किया जाता है। यदि हम इसके इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रसार-कक्ष (Studios) और प्रेषित्रों (Transmitters) की आधारभूत सेवाओं के लिहाज़ से देखें, तो दूरदर्शन आज भी पूरे विश्व का दूसरा सबसे विशाल और व्यापक प्रसारक तंत्र है, जिसकी पहुँच भारत के सुदूर गाँवों और पर्वतीय अंचलों तक है।

 

​विनीत शुरुआत से रंगीन क्रांति तक का सफरनामा

​जैसा कि हम जानते हैं, दूरदर्शन का यह सफर रातों-रात तय नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे क्रमिक विकास की एक लंबी कहानी है:

​सितंबर, १९५९ (विनीत शुरुआत): दूरदर्शन का पहला बीजारोपण दिल्ली में महज़ एक परीक्षण (Experimental) के तौर पर बहुत ही सीमित संसाधनों के साथ हुआ था।

​१९६५ (नियमित दैनिक प्रसारण): ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) के एक अभिन्न अंग के रूप में इसके नियमित दैनिक प्रसारण की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसने समाचार और सूचना के युग का सूत्रपात किया।

​१९७२ से १९७५ (भौगोलिक विस्तार): सन १९७२ में इसकी सेवाओं का विस्तार मुम्बई (बंबई) और अमृतसर तक किया गया। इसके बाद रफ्तार बढ़ी और १९७५ आते-आते यह अनूठी सुविधा देश के ७ प्रमुख बड़े शहरों में शुरू हो चुकी थी।

​१९८२ (रंगीन राष्ट्रीय प्रसारण): और अंततः २५ अप्रैल, १९८२ को वह बहुप्रतीक्षित दिन आया, जब दिल्ली एशियाई खेलों (Asiad Games) के ठीक पहले भारतीय टेलीविजन को रंगीन कर दिया गया और राष्ट्रीय प्रसारण की शुरुआत हुई।

 

​प्रसारण युद्ध का मैदान और दूरदर्शन की सेना (चैनलों का वर्गीकरण)

​कालांतर में जब उदारीकरण के दौर में निजी और विदेशी सैटेलाइट चैनलों की बाढ़ आई, तो दूरदर्शन ने भी पीछे हटने के बजाय उस ‘प्रसारण युद्ध’ के मैदान में डटकर मुकाबला किया। समय के साथ दूरदर्शन ने अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए विभिन्न श्रेणियों में अपने चैनलों का एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया, जो निम्न प्रकार है:

​क. राष्ट्रीय चैनल (कुल ५):

​ये वो चैनल हैं जो पूरे देश की मुख्यधारा को जोड़ते हैं:

​डीडी नेशनल (डीडी १): देश का सबसे पुराना और लोकप्रिय सामान्य मनोरंजन चैनल।

​डीडी न्यूज़: देश का एकमात्र निष्पक्ष और २४ घंटे प्रसारित होने वाला सरकारी समाचार चैनल।

​डीडी भारती: भारत की कला, संस्कृति, संगीत और विरासत को समर्पित अनूठा मंच।

​डीडी स्पोर्ट्स: खेल जगत की हर छोटी-बड़ी गतिविधि को जन-जन तक पहुँचाने वाला माध्यम।

​डीडी उर्दू: उर्दू भाषा की तहज़ीब, अदब और शायरी को सहेजता चैनल।

​ख. क्षेत्रीय भाषाओं के उपग्रह चैनल (कुल ११):

​विविधता में एकता के मंत्र को चरितार्थ करते हुए विभिन्न राज्यों की अपनी भाषाओं के चैनल:

​डीडी उत्तर पूर्व (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए), डीडी बंगाली, डीडी गुजराती, डीडी कन्नड़, डीडी कश्मीर, डीडी मलयालम, डीडी सहयाद्रि (मराठी), डीडी उड़िया, डीडी पंजाबी, डीडी सप्तगिरी (तेलुगु) और डीडी पोधीगई (तमिल)।

​ग. क्षेत्रीय राज्य नेटवर्क (कुल ११):

​स्थानीय स्तर पर राज्यों की संस्कृति और समाचारों के लिए समर्पित प्रादेशिक नेटवर्क:

​बिहार, झारखण्‍ड, छत्तीसगढ़, मध्‍य प्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, उत्तराखण्‍ड, हिमाचल प्रदेश, राजस्‍थान, मिजोरम और त्रिपुरा।

​घ. अंतर्राष्ट्रीय चैनल (कुल १):

​डीडी इंडिया: वैश्विक पटल पर भारत के दृष्टिकोण, संस्कृति और समाचारों को दुनिया के सामने रखने वाला अंतरराष्ट्रीय चैनल।

 

​डीडी डायरेक्ट + (डीडी फ्री डिश): ग्रामीण भारत की तकनीकी जीवन रेखा

​दूरदर्शन के इतिहास में प्रसारण के बाद जो सबसे बड़ी और क्रांतिकारी घटना घटी, वह थी उसकी ‘फ्री-टू-एयर डीटीएच सेवा’—डीडी डायरेक्ट+ (जिसे आज हम ‘डीडी फ्री डिश’ के नाम से भी जानते हैं)।

​शुभारंभ: इस महत्वाकांक्षी सेवा का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा १६ दिसम्बर, २००४ को किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश के उस गरीब और ग्रामीण वर्ग तक मनोरंजन पहुँचाना था जो महंगे केबल नेटवर्क का खर्च नहीं उठा सकते थे।

​शुरुआती सफर: इसकी शुरुआत महज़ ३३ टीवी चैनलों (जिसमें दूरदर्शन और कुछ चुनिंदा निजी चैनल शामिल थे) और १२ रेडियो (आकाशवाणी) चैनलों के साथ हुई थी।

​अभूतपूर्व विस्तार: समय के साथ इसकी सेवा क्षमता में भारी इज़ाफा हुआ और यह बढ़कर ५९ से अधिक टीवी चैनलों और २१ से अधिक रेडियो चैनलों के विशाल बुके में तब्दील हो गई।

​पहुँच और उपभोक्ता: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सुदूरवर्ती क्षेत्रों को छोड़कर, इसके सिग्नल आज एक साधारण रिसीवर प्रणाली (छतरी और सेट-टॉप बॉक्स) के माध्यम से पूरे भारत में मुफ्त प्राप्त होते हैं। वर्तमान में इस सेवा के उपभोक्ताओं (ग्राहकों) की संख्या १०० लाख (१ करोड़) से भी अधिक का आंकड़ा पार कर चुकी है, जो इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

​तकनीक के इस नए दौर में भी दूरदर्शन अपनी शुचिता, प्रामाणिकता और सरोकार वाली पत्रकारिता के कारण आज भी भारतीय समाज की आत्मा बना हुआ है।

​धन्यवाद !

 

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