मोबाइल मेरी परछाई नहीं, मेरे कल के काल का अंधेरा है। पीठ पर लादे...
कविता
मौलिक हिंदी कविताओं का विशाल संग्रह: सामाजिक, आध्यात्मिक और विचारोत्तेजक
“हमारे ‘कविता’ अनुभाग में आपका स्वागत है! यहाँ आपको विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण द्वारा रचित सभी मौलिक हिंदी कविताएँ मिलेंगी। इस संग्रह में ‘मोबाइल का नशा’ और ‘मानवता के द्रोही’ जैसी महत्वपूर्ण रचनाएँ शामिल हैं, जो सामाजिक समस्याओं, पर्यावरण संरक्षण और जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डालती हैं। हिंदी कविता के इस अद्भुत संसार में गोता लगाएँ।”
विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण कहते हैं, ‘कुछ ना कहकर सब कुछ कह जाने की कला ही कविता है’
मूल से मूल निकालोगे, तो क्या मूल्य तुम पाओगे। सत्य से सत्य को...
अगर बरसातें होती तो क्या बात होती अगर बरसातें… तो क्या… कुछ...
दोपहर की चाय पर काव्य पाठ: अकेलेपन की साथी क्या खास है इसमें...
बड़ी चाह थी कि जिंदगी लहरा कर चलती रहे, मगर हादसे ऐसे हुए...
न जाने वो कहाँ चली गयी बिन उसके जीवन सजा हो गयी ...
आज अयोध्या में नया भोर है, नए भोर का यह समारोह है। हर...
कितने झंझावात आते, सबको उसने झेला था। जितने बाधा, कंटक आते, सबसे उसने खेला...
यदि दुनिया गुलाबी होती, तो जगत सजीवन होता। मानव सादगी से भरे होते,...
एक बार रत्नाकर डाकू ने बीहड़ में देवर्षि नारद को रोका, उसका स्वभाव था...