एक दिन मेरी गांधी से भेंट हो गई चीरपरीचीत भाव से यूं ही मुस्कुरा...
कविता
मौलिक हिंदी कविताओं का विशाल संग्रह: सामाजिक, आध्यात्मिक और विचारोत्तेजक
“हमारे ‘कविता’ अनुभाग में आपका स्वागत है! यहाँ आपको विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण द्वारा रचित सभी मौलिक हिंदी कविताएँ मिलेंगी। इस संग्रह में ‘मोबाइल का नशा’ और ‘मानवता के द्रोही’ जैसी महत्वपूर्ण रचनाएँ शामिल हैं, जो सामाजिक समस्याओं, पर्यावरण संरक्षण और जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डालती हैं। हिंदी कविता के इस अद्भुत संसार में गोता लगाएँ।”
विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण कहते हैं, ‘कुछ ना कहकर सब कुछ कह जाने की कला ही कविता है’
आधी अधूरी आजादी हिंद सिसक सिसक कहता है, क्या ये जश्न इतना जरूरी है।...
एक पाति पत्नी के नाम तुम जब नहीं होती… ये हवाएं थम जाती हैं...
नगाड़े बज उठे दुंदुभी भी बज पड़ी है कुछ तो होने वाला है...
जमाने के रंग जब जब बदले, तुम भी यूं ही बदल गए। जवानी...
आओ कुछ बात करें अपने जहान की, हाँथ ही बात करेंगे दबे बेज़ुबान...
जिंदगी के टेढ़े-मेढ़े राहों से, एक शाम गुजरती है। उस शाम से सुबहा...
प्रेम आखों कि ईनायत है वो दिल कि बरकत है वो उपजता है...
खिड़की से जब बाहर झांकता हूँ, यादे पास चली आती हैं। कुछ पुराने...