April 4, 2025

Exif_JPEG_420

सोने के लिए जागना

घर की अटारी पर
किताबें भरी हुई हैं
मेरी रातों की नींद
हराम करने को

कई रातों से
सोने के लिए वे
मुझे जगा रहे हैं

मैं पढ़ता हूँ उनको
वो पढ़ते हैं मुझको
पूरी रात जागते हैं
सुबह से शाम तक
इस जहां को पढ़ने को

आंखें ना वो
कभी बंद करते हैं
और ना ही हम
कभी बंद करते हैं
नाही बंद करना चाहते हैं

सवालों के हजारों
अनसुलझे तार
आंखें बंद करते ही
जेहन में घूमने लगते हैं

उन्हें सुलझाने को
गहरी नींद सुलाने को
वो खुद तो जागते हैं
हमें भी पूरी रात जगाते हैं

अश्विनी राय ‘अरूण’
मांगोडेहरी, बक्सर, बिहार

About Author

Leave a Reply

RocketplayRocketplay casinoCasibom GirişJojobet GirişCasibom Giriş GüncelCasibom Giriş AdresiCandySpinzDafabet AppJeetwinRedbet SverigeViggoslotsCrazyBuzzer casinoCasibomJettbetKmsauto DownloadKmspico ActivatorSweet BonanzaCrazy TimeCrazy Time AppPlinko AppSugar rush