चोर निगाहें प्रेम आँखों की इनायत है, वही दिल की बरकत है। उपजता...
अश्विनी राय अरुण प्रेम कविता
प्रेम: एक निःस्वार्थ उपहार प्रिय स्वयं को सदा, प्रिय के ही लिए संवारता...
प्रेम: एक निःस्वार्थ उपहार प्रिय स्वयं को सदा, प्रिय के ही लिए संवारता...