प्यार का पंचतत्व: बचपन की निश्छलता से जीवनसंगिनी की पूर्णता तक का एक आत्मीय...
विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण
अपने मुंह में, तुझे धर लेगा। अजगर की तरह, जकड़ लेगा। अगर विश्वास...
यात्रा करना मनुष्य की नैसर्गिक प्रवृत्ति है, जो उसके जरूरत, उसकी आवश्यकताओं से शुरू...
रात की अलसाई मंजरी भोर के एक चुम्बन से, सकुचाई लालिमा लिए रवि के...
नगाड़े बज उठे दुंदुभी भी बज पड़ी है कुछ तो होने वाला है...
जमाने के रंग जब जब बदले, तुम भी यूं ही बदल गए। जवानी...
जिंदगी के टेढ़े-मेढ़े राहों से, एक शाम गुजरती है। उस शाम से सुबहा के...
जीवन चलने का नाम है, इसमें कितने विचार पल रहे हैं। वे विचार...
मुक्तिबोध: बाज़ार, वादों और अंतहीन प्रतीक्षा का आख्यान लेखक: विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’ ...