मदन कश्यप: जन-सरोकारों और गहरी संवेदना के कवि हिंदी साहित्य के समकालीन परिदृश्य में...
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आओ कुछ बात करें अपने जहान की, हाँथ ही बात करेंगे दबे बेज़ुबान...
सियासत भूख की भूख तो शायद मौत से भी बड़ी होती है, सुबह...