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शादी वाली बात

 

​शादी वाली बात है,

अजी हमारी शादी वाली बात है।

 

​सिमटी हुई सी,

सिकुड़ी हुई सी।

शरमाई थी या घबराई थी,

जब सामने मेरे वो आई थी।

 

​जान पड़ा मानो परियों के देश से,

कोई सुन्दरी उतर कर आई थी।

 

​सुर्ख लाल जोड़े में थी वो,

माथे पे लाल बिंदिया थी उसके।

अधरों की लाली दमक रही थी,

हाथों में खनकती लाल चूड़ियां थीं उसके।

 

​हथेली पे मेहंदी का रंग भी लाल,

गोरे मुखड़े पर लज्जा की लाली छाई थी।

चहुँ ओर गूँजती खुशियां ही खुशियां,

जब सुरीली मधुर शहनाई थी।

 

​सखियों ने मंगल-गीत गाए,

ब्राह्मणों ने मंत्रों का गान किया।

मैं दूल्हा बने खड़ा था तब,

जब वो दुल्हन बन कर आई थी।

 

​जैसे ही वो सुंदर बेला आई,

विहंगों ने नभ से फूल बरसाया।

लाल सिंदूर से मांग भरकर हमने,

उस परी को अपनी दुल्हन बनाया।

 

 

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