कहीं शहद सी घुलती मिश्री, कहीं वीरता की हुंकार है, मेरे बिहार की...
कविता
मौलिक हिंदी कविताओं का विशाल संग्रह: सामाजिक, आध्यात्मिक और विचारोत्तेजक
“हमारे ‘कविता’ अनुभाग में आपका स्वागत है! यहाँ आपको विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण द्वारा रचित सभी मौलिक हिंदी कविताएँ मिलेंगी। इस संग्रह में ‘मोबाइल का नशा’ और ‘मानवता के द्रोही’ जैसी महत्वपूर्ण रचनाएँ शामिल हैं, जो सामाजिक समस्याओं, पर्यावरण संरक्षण और जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डालती हैं। हिंदी कविता के इस अद्भुत संसार में गोता लगाएँ।”
विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण कहते हैं, ‘कुछ ना कहकर सब कुछ कह जाने की कला ही कविता है’
सात समंदर पार गूँजती, मॉरीशस से सूरीनाम तक, भोजपुरी की गंध महकती, सुबह से...
एक नई सुबह का वादा बीते साल की धुंधली यादें, आँखों के कोरों...
चार दीवारी, पर घर नहीं किराए का घर—एक अस्थायी पता, जहाँ दीवारों को...
📜 ज्ञान का ‘महानगर’: व्यास की कृतियों का वर्णन मैं चला हूँ उस...
क्या मन आपको भटका रहा है या मौन आपको जड़ से जोड़ रहा है?...
जग क्या है? बस एक आईना, वही दिखाता, जो मन ने ठाना। जैसा...
I आम नजर में, दो नहीं, एक ही नाम; शिव ही शंकर, शंकर ही...
गांव से मासूमियत को, नगर से उसके नागरिक तो रास्तों से उसकी मंजिल को...
ए दोस्त! आयेगा एक दिन ऐसा, या आ गया है कहीं चुपके से क्या...