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​श्री कृष्ण बल्लभ सहाय: आधुनिक बिहार के निर्माता और जननायक

 

​भूमिका

बिहार की राजनीतिक चेतना और भूमि सुधारों के जनक कहे जाने वाले श्री कृष्ण बल्लभ सहाय का जन्म ३१ दिसम्बर, १८९८ को पटना के सेखपुर में एक मध्यवर्गीय कायस्थ परिवार में हुआ था। पटना और हजारीबाग की मिट्टी में पले-बढ़े कृष्ण बल्लभ जी का व्यक्तित्व मेधा और राष्ट्रवाद का अद्भुत मिश्रण था। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक ऐसे सुधारक थे जिन्होंने बिहार की सामाजिक और आर्थिक संरचना को बदलने का साहस किया।

 

​शिक्षा का त्याग और स्वतंत्रता संग्राम में पदार्पण

​कृष्ण बल्लभ सहाय जी ने पटना कॉलेज से स्वर्ण पदक के साथ स्नातक किया था। जब वे कानून की उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तभी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ‘असहयोग आंदोलन’ (१९२०) की पुकार ने उन्हें उद्वेलित कर दिया। एक मेधावी छात्र ने करियर की चिंता छोड़ देश की आजादी के लिए अपनी शिक्षा बीच में ही त्याग दी।

​१९२३ में उन्होंने स्वराज पार्टी के मंत्री के रूप में बिहार विधान परिषद में प्रवेश किया, जहाँ से उनकी विधायी राजनीति की शुरुआत हुई। सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा, किंतु उनका संकल्प हिमालय की तरह अडिग रहा।

 

​किसान आंदोलन और सामाजिक क्रांति

​के.बी. सहाय का सबसे महत्वपूर्ण योगदान किसानों के प्रति उनकी संवेदनशीलता थी। उन्होंने स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा चलाए गए किसान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। बिहार के मुख्यमंत्री बनने से पहले, राजस्व मंत्री के रूप में उन्होंने वह ऐतिहासिक कार्य किया जिसके लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है— ‘ज़मींदारी प्रथा का उन्मूलन’।

​शक्तिशाली ज़मींदारों के विरोध के बावजूद उन्होंने बिहार में भूमि सुधारों को लागू किया, ताकि गरीब और भूमिहीन किसानों को उनका हक मिल सके। यह आधुनिक भारत के सबसे क्रांतिकारी सामाजिक कदमों में से एक था।

 

​बिहार के मुख्यमंत्री और विकास की दृष्टि

​१९६३ में उन्होंने बिहार के चौथे मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाली। उनके कार्यकाल में बिहार में औद्योगिक विकास और शिक्षा के क्षेत्र में कई नीतियां बनीं। वे सादगी और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक थे। अंग्रेजी साल के अंतिम दिन जन्मे इस महापुरुष ने अपना पूरा जीवन बिहार की सेवा में समर्पित कर दिया।

 

​प्रमुख तिथियाँ और उपलब्धियाँ

३१ दिसम्बर, १८९८ – पटना के सेखपुर में जन्म

१९२० – असहयोग आंदोलन में शामिल होने हेतु शिक्षा का त्याग

१९२३ – बिहार विधान परिषद के सदस्य (स्वराज पार्टी)

१९४६ – १९५७ – बिहार के राजस्व मंत्री (ज़मींदारी प्रथा खत्म करने का श्रेय)

१९६३ – १९६७ – बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा

३ जून, १९७४ – एक सड़क दुर्घटना में हजारीबाग के पास देहावसान

 

कृष्ण बल्लभ सहाय जी का जीवन संदेश देता है कि राजनीति केवल सत्ता पाने का माध्यम नहीं, बल्कि निर्बलों को सशक्त बनाने का साधन है। बिहार के राजस्व सुधारों की जब भी चर्चा होगी, के.बी. सहाय का नाम स्वर्णाक्षरों में लिया जाएगा।

— विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’

 

 

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