सामने रोशन मंच सजा, किरदार बुलाते हैं, झूठी हँसी के गहने, सबको यहाँ सुहाते...
अश्विनी राय ‘अरुण’ की दार्शनिक रचनाएँ
भीड़ भरी दुनिया में, मैं तन्हा सा रहता हूँ, खामोशी की चादर ओढ़े, मन...
अंतर्द्वंद्व की परछाइयाँ मेरा लक्ष्य क्या पैसा है? मुझे पता नहीं! मेरा...