भीड़ भरी दुनिया में, मैं तन्हा सा रहता हूँ, खामोशी की चादर ओढ़े, मन...
Philosophy
दो आँखों से देखा हमने, बस दुनिया का मेला है, छल, कपट और भीड़...
गीत: श्रद्धा का संवाद (स्थायी) ए पुजारी रे! काहे को तू पूजा करत है?...