भीड़ भरी दुनिया में, मैं तन्हा सा रहता हूँ, खामोशी की चादर ओढ़े, मन...
Philosophy
दो आँखों से देखा हमने, बस दुनिया का मेला है, छल, कपट और भीड़...
गीत: श्रद्धा का संवाद (स्थायी) ए पुजारी रे! काहे को तू पूजा करत है?...
कुरुक्षेत्र: अंतर्द्वंद्व का महासमर गांधारी गम के सागर में डूबी, अपने ममता के...
खिड़की: एक आत्म-साक्षात्कार खिड़की से जब बाहर झांकता हूँ, यादें चुपके से पास...
तलाशते अवसर कितने बोझिल थे, वे प्रतीक्षा के क्षण, तुम्हारे इंतज़ार में। मेरे...
प्रभाव दिनांक: १७/०१/२०२० पुरुषार्थ के सामर्थ्य में शक्ति के शब्दार्थ में जो भाव...