सच नंगा फिरता है, कोई पास नहीं आता, रेशम पहने झूठे से, हर कोई...
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कृष्ण चंदर: मानवीय संवेदनाओं और तीखे व्यंग्य के बेजोड़ चितेरे साहित्य की दुनिया...
खामोश शोर वह टकटकी लगाए देखता रहा— कभी उस चमकती वीआईपी गाड़ी को, तो...