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कविता का विषय: आंतरिक शांति की तलाश, सुकून का विरोधाभास, विवाह बनाम अकेलापन।

 

मैंने शादी की कि
सुकून से रह सकूं,
किसी और ने शादी नहीं की
कि सुकून से रह सके।

मेरी सुकून से कटी या नहीं
ये मैं जानता हूं
मगर उसकी सुकून से कटी
ये कौन जानता है।

एक मैं हूं, एक वह है
जो सुकून खोजते हैं
मगर दोनों की ऐसी आदत है कि
सुकून से रह ही नहीं पाते

मैं उसके साथ रहता हूं तो
सुकून खातिर शांति ढूंढता हूं
वह अकेला है तो सुकून खातिर
कोलाहल खोजता है

हम दोनों बेचैन हैं,
रहते हैं एक दीवाल के पार
ढूंढने सुकून को निकलते हैं
घर से बाहर बार बार 

 

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