महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर, भगवान शिव की महिमा को समर्पित विशेष रचना प्रस्तुत...
हिंदी कविता
हाथों की गंदगी छिप जाए, इसलिए पहने हैं ‘दस्ताने’, अपनी फितरत बदल न सके,...
सज गई मेज़ और सज गई थाली, हवा में महक है बड़ी निराली! आज...
एक नई सुबह का वादा बीते साल की धुंधली यादें, आँखों के कोरों...
चार दीवारी, पर घर नहीं किराए का घर—एक अस्थायी पता, जहाँ दीवारों को...
मोबाइल मेरी परछाई नहीं, मेरे कल के काल का अंधेरा है। पीठ पर लादे...
मूल से मूल निकालोगे, तो क्या मूल्य तुम पाओगे। सत्य से सत्य को...
अगर बरसातें होती तो क्या बात होती अगर बरसातें… तो क्या… कुछ...
दोपहर की चाय पर काव्य पाठ: अकेलेपन की साथी क्या खास है इसमें...
बड़ी चाह थी कि जिंदगी लहरा कर चलती रहे, मगर हादसे ऐसे हुए...