पुस्तक : मेरे सपनों की सरकार
(५५ माह बनाम ५५ साल)
लेखक : डॉ स्वामीनाथ तिवारी
(MLA, ब्रह्मपुर : १९९०)

 

समीक्षा: ‘मेरे सपनों की सरकार’ — इतिहास के दर्पण में वर्तमान का प्रतिबिंब

​समीक्षक: अश्विनी राय ‘अरूण’

​इतिहास केवल बीता हुआ कल नहीं होता, बल्कि वह एक ऐसा शिक्षक है जो वर्तमान की भूलों को सुधारने और भविष्य की राह चुनने में हमारी सहायता करता है। डॉ. स्वामीनाथ तिवारी (पूर्व विधायक, ब्रह्मपुर) की सद्य प्रकाशित पुस्तक ‘मेरे सपनों की सरकार: ५५ माह बनाम ५५ साल’ इसी ऐतिहासिक संवाद का एक जीवंत दस्तावेज़ है।

 

​अतीत और सपनों का मनोवैज्ञानिक संबंध

​लेखक ने पुस्तक की शुरुआत में ही यह स्थापित कर दिया है कि सपनों का अतीत से गहरा रिश्ता होता है। मनोविज्ञान के इस पक्ष को आधार बनाकर जब हम इस पुस्तक को पढ़ते हैं, तो यह केवल राजनीतिक तुलना नहीं रह जाती, बल्कि एक राष्ट्र की विकास यात्रा का तुलनात्मक अध्ययन बन जाती है। एक छात्र के तौर पर इस पुस्तक का अध्ययन करने पर जो सबसे महत्वपूर्ण बात उभर कर आती है, वह है—इतिहास के प्रति लेखक की ईमानदारी।

 

​५५ माह बनाम ५५ साल: एक लकीर खींचने का प्रयास

​पुस्तक का शीर्षक ही वर्तमान और अतीत के बीच एक स्पष्ट विभाजक रेखा खींचता है। डॉ. स्वामीनाथ तिवारी जी ने वर्तमान सरकार के कार्यों को स्पष्ट करने के लिए इतिहास के विभिन्न कालखंडों से जो उदाहरण लिए हैं, वे तर्कसंगत प्रतीत होते हैं।

​इतिहास से संवाद: अक्सर कहा जाता है कि हमें आगे की ओर देखना चाहिए, लेकिन डॉ. साहब का मानना है कि वर्तमान को सही ढंग से समझने के लिए पीछे मुड़कर देखना भी आवश्यक है।

​गड़े मुर्दे या आत्म-परिचय?: लेखक की इस दृष्टि को कुछ लोग “गड़े मुर्दे उखाड़ना” कह सकते हैं, लेकिन यदि निष्पक्ष भाव से देखा जाए, तो यह स्वयं से स्वयं का परिचय कराने जैसा है। हम कहाँ थे, हमने क्या खोया और आज हम कहाँ खड़े हैं—इन सवालों के जवाब इसी ऐतिहासिक लकीर के इर्द-गिर्द घूमते हैं।

 

​निष्कर्ष

​’मेरे सपनों की सरकार’ केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि यह उन आकांक्षाओं का संकलन है जो एक राजनेता और एक जागरूक नागरिक अपने देश के लिए संजोता है। डॉ. तिवारी का यह प्रयास पाठकों को विवश करता है कि वे भी इतिहास के साथ एक संवाद कायम करें और राष्ट्र निर्माण की इस प्रक्रिया को गहराई से समझें।

अश्विनी राय ‘अरूण’

धन्यवाद !

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *