अभ्युदय पत्रिका पिता विशेषांक कभी पाबंदियों का फरमान तो कभी नए नए कानूनों से...
कविता
मौलिक हिंदी कविताओं का विशाल संग्रह: सामाजिक, आध्यात्मिक और विचारोत्तेजक
“हमारे ‘कविता’ अनुभाग में आपका स्वागत है! यहाँ आपको विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण द्वारा रचित सभी मौलिक हिंदी कविताएँ मिलेंगी। इस संग्रह में ‘मोबाइल का नशा’ और ‘मानवता के द्रोही’ जैसी महत्वपूर्ण रचनाएँ शामिल हैं, जो सामाजिक समस्याओं, पर्यावरण संरक्षण और जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डालती हैं। हिंदी कविता के इस अद्भुत संसार में गोता लगाएँ।”
विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण कहते हैं, ‘कुछ ना कहकर सब कुछ कह जाने की कला ही कविता है’
मंगल भवन अमंगल हारी द्रबहु सुदसरथ अजिर बिहारी (राम सिया राम, सिया राम जय...
सुबह हो गई, मोर्निग वॉक नहीं, दूध लेने जाना है। कहीं देरी हो...
#UBIContest – 77 विषय : उड़ान संख्या २०२२ विधा : कविता शीर्षक : हौसलों...
सोने के लिए जागना घर की अटारी पर किताबें भरी हुई हैं मेरी रातों...
आंखो से बहते स्याही को जज़्बात की कलम में ढाल कर अपने धड़कन की...
नफरत से देखने लगे अथवा छूत मान लिए हैं। घर परिवार वाले अथवा...
एक दिन मेरी गांधी से भेंट हो गई चीरपरीचीत भाव से यूं ही मुस्कुरा...
आधी अधूरी आजादी — विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’ हिंद सिसक-सिसक कहता है, क्या...
एक पाति पत्नी के नाम तुम जब नहीं होती… ये हवाएं थम जाती हैं...