नगाड़े बज उठे दुंदुभी भी बज पड़ी है कुछ तो होने वाला है...
कविता
मौलिक हिंदी कविताओं का विशाल संग्रह: सामाजिक, आध्यात्मिक और विचारोत्तेजक
“हमारे ‘कविता’ अनुभाग में आपका स्वागत है! यहाँ आपको विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण द्वारा रचित सभी मौलिक हिंदी कविताएँ मिलेंगी। इस संग्रह में ‘मोबाइल का नशा’ और ‘मानवता के द्रोही’ जैसी महत्वपूर्ण रचनाएँ शामिल हैं, जो सामाजिक समस्याओं, पर्यावरण संरक्षण और जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डालती हैं। हिंदी कविता के इस अद्भुत संसार में गोता लगाएँ।”
विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण कहते हैं, ‘कुछ ना कहकर सब कुछ कह जाने की कला ही कविता है’
जमाने के रंग जब जब बदले, तुम भी यूं ही बदल गए। जवानी...
आओ कुछ बात करें अपने जहान की, हाँथ ही बात करेंगे दबे बेज़ुबान...
जिंदगी के टेढ़े-मेढ़े राहों से, एक शाम गुजरती है। उस शाम से सुबहा के...
जीवन चलने का नाम है, इसमें कितने विचार पल रहे हैं। वे विचार...
चोर निगाहें प्रेम आँखों की इनायत है, वही दिल की बरकत है। उपजता...
खिड़की: एक आत्म-साक्षात्कार खिड़की से जब बाहर झांकता हूँ, यादें चुपके से पास...
शादी वाली बात शादी वाली बात है, अजी हमारी शादी वाली बात है।...
प्रेम: एक निःस्वार्थ उपहार प्रिय स्वयं को सदा, प्रिय के ही लिए संवारता...
निगाहें और वफ़ा उनकी हिकारत को हम सहते रहे, मगर लब सदा ख़ामोश...