क्रोध भी हाजिर है, बस दिखाने के, डराने...
कविता
ए अलबेली री तू औरत करैली सुगंधित धनिया...
मेरी अनेकानेक गलतियों में एक गलती यह है...
हर बार क्यूं वो आजादी की बात करते...
रात की अलसाई मंजरी भोर के एक चुम्बन...
कान लगा, सुन तो जरा ये खामोशी क्या कहती...
हम सीता के जन्मस्थली, राम ज्ञान अपार हईं।...
अभ्युदय पत्रिका पिता विशेषांक कभी पाबंदियों का फरमान तो...
मंगल भवन अमंगल हारी द्रबहु सुदसरथ अजिर बिहारी (राम...