April 23, 2024

 

मेरी अनेकानेक गलतियों में

एक गलती यह है कि

मैं राजनीति नहीं जानता

मैं कूटनीति भी नहीं जानता

मेरी मातृभूमि मृत्यशय्या पर

दिन गिनने को लाचार है

मगर मैं कुछ कर नहीं सकता

यह मेरी एक और गलती है

सुन सकता हूं, किन्तु वधिर हूं

बस देखता हूं, इतना गंभीर हूं

मेरी गलती बस इतनी है कि

मैं मूक नहीं बस चुप हूं

मेरे पैर भी हैं, मगर जड़ हूं

इंसान रूपी मैं एक बड़ा बड़ हूं

खड़े खड़े ही फल तोड़ लेता हूं 

हाथ भी हैं उन्हें बस जोड़ लेता हूं

मेरी अनेकानेक गलतियों में

यह भी एक गलती है कि

मैं कोई गलती नहीं करता,

मगर सच मानिए मैं गलत हूं 

इन गलतियों में सबसे बड़ी

गलती यह है कि मैं पुरुष हूं

बड़ी बड़ी बातों का पिटारा

मैं त्रुटि रहित तत्पुरुष हूं

विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’ 

About Author

Leave a Reply