सुबह हो गई, मोर्निग वॉक नहीं, दूध लेने...
कविता
#UBIContest – 77 विषय : उड़ान संख्या २०२२ विधा...
सोने के लिए जागना घर की अटारी पर किताबें...
आंखो से बहते स्याही को जज़्बात की कलम में...
नफरत से देखने लगे अथवा छूत मान लिए...
एक दिन मेरी गांधी से भेंट हो गई चीरपरीचीत...
आधी अधूरी आजादी हिंद सिसक सिसक कहता है, क्या...
एक पाति पत्नी के नाम तुम जब नहीं होती…...
नगाड़े बज उठे दुंदुभी भी बज पड़ी है...
जमाने के रंग जब जब बदले, तुम भी...