April 21, 2024

दशहरा (विजयादशमी व आयुध-पूजा) सनातनी त्यौहार है, जो अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आता है। भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा महादेवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को ‘विजयादशमी’ के नाम से जाना जाता है (दशहरा = दशहोरा = दसवीं तिथि)। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा।

अश्विन शुक्ल की दशमी तिथि (दशहरा)…

दशहरे का त्यौहार आंतरिक शक्ति और बाहरी शक्ति के समन्वय को स्थापित करने का त्यौहार है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि नवरात्रि के नौ दिन जगदम्बा की उपासना से शक्तिशाली हुआ मनुष्य बाहरी परिस्थिति पर विजय प्राप्त करने हेतु तत्पर रहता है। अतः यही कारण है कि दशहरा को विजयदशमी भी कहा जाता है।

भारतीय संस्कृति…

भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता एवं शौर्य का पर्याय रही है। यहां की माटी में भी वीरता की महक आती है। वैसे तो इस संस्कृति में शांति और सद्भाव को अधिक महत्व दिया गया है, मगर यदि कभी युद्ध अनिवार्य हो ही जाए तो शत्रु के आक्रमण की प्रतीक्षा ना कर उस पर हमला कर उसका पराभव करना ही कुशल राजनीति है। भगवान श्रीराम के समय से यह दिन विजय प्रस्थान का प्रतीक निश्चित है। भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध हेतु इसी दिन को शुभ माना था। छत्रपती शिवाजी महाराज ने भी औरंगजेब के विरुद्ध इसी दिन को युद्ध प्रस्थान के लिए शुभ माना। इस तरह कहा जा सकता है कि इतिहास में अनेक उदाहरण हैं जब हिन्दू राजा इस दिन विजय-प्रस्थान करते थे।

महत्व…

भगवती के ‘विजया’ नाम पर भी दशहरे को ‘विजयादशमी’ कहते हैं। आज ही के दिन भगवान श्रीरामचंद्र जी का चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात अयोध्या में आगमन हुआ था। इसलिए भी इस पर्व को ‘विजयादशमी’ के रूप में मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय ‘विजय’ नामक मुहूर्त होता है। यह काल सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है। इसलिए भी इसे विजयादशमी कहते हैं।

शमी वृक्ष पूजन…

आज के दिन श्रवण नक्षत्र का योग और भी अधिक शुभ माना गया है। युद्ध करने का प्रसंग न होने पर भी इस काल में राजाओं (महत्त्वपूर्ण पदों पर पदासीन लोग) को सीमा का उल्लंघन करना चाहिए। दुर्योधन ने पांडवों को जुए में पराजित करके बारह वर्ष के वनवास के साथ तेरहवें वर्ष में अज्ञातवास की शर्त दी थी। तेरहवें वर्ष यदि उनका पता लग जाता तो उन्हें पुनः बारह वर्ष का वनवास भोगना पड़ता। इसी अज्ञातवास में अर्जुन ने अपना धनुष एक शमी वृक्ष पर रखा था तथा स्वयं वृहन्नला वेश में राजा विराट के यहां चाकर बने थे। जब गोरक्षा के लिए विराट के पुत्र उत्तर ने अर्जुन को अपने साथ लिया, तब अर्जुन ने शमी वृक्ष पर से अपने हथियार उठाकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त की थी। विजयादशमी के दिन भगवान श्रीरामचंद्रजी के लंका पर चढ़ाई करने के लिए प्रस्थान करते समय शमी वृक्ष ने भगवान की विजय का उद्घोष किया था। विजयकाल में शमी का पूजन अवश्य करना चाहिए।

आयोजन…

आज के दिन लोग शस्त्र-पूजन का विधान है, साथ ही अक्षर लेखन का आरम्भ, नए उद्योग का आरम्भ, बीज बोना आदि नए कार्य करने का विधान है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो भी कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय प्राप्त होती है। इसीलिए प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन स्थान-स्थान पर मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम 

About Author

1 thought on “विजयादशमी

Leave a Reply