July 20, 2024

भारतीय राजनीतिक इतिहास में बहुत बड़े बड़े उठापटक हुए हैं, मगर वर्तमान को समझने के लिए उस इतिहास से मदद लेनी ही पड़ती है। आज हम ऐसे ही इतिहास की एक धुलधुसरीत पृष्ठ से आप को मिलाते हैं। सच मानिए तो इस पृष्ठ के बिना आज की राजनीति का कोई परिचय ही नहीं है। उदाहरण के लिए हम कुछेक नाम देंगे बाकी आप को स्वयं फैसला करना है, मैंने जो कहा वो कितना सही है…

हम आज जिस पृष्ठ की अथवा जिस महान विभूति की बात करने जा रहे हैं, उन्होंने ही जम्मू कश्मीर प्रजा परिषद की स्थापना की थी। उन्होंने ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की भी स्थापना की थी। और सबसे बड़ी बात वे भारतीय जन संघ के संस्थापकों में से एक एवं अध्यक्ष भी थे। अब आप ही बताइए क्या यह भुलाने योग्य है ? ? ?

भारतीय राजनीति की मुख्यधारा को एक नई दिशा देने वाले इस पुरोधा को कैसे गुमनामी की अंधेरी गुफा में खो दिया जाता है इसका जीवंत उदाहरण हैं, प्रोफेसर बलराज मधोक…

जिस कश्मीर समस्या के समाधान के लिए आज हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जहां बधाई दे रहे हैं वहीं उसको प्रारम्भ में ही नष्ट करने का प्रयास करने वाले प्रोफेसर मधोक को हम कैसे भुल गए। हाँ! ये अलग बात है की तत्कालीन शासकों ने मधोक जी की बात को अनसुना कर दिया, और कश्मीर समस्या एक छोटे से घाव से नासूर कब बन गया यह आज किसी से छुपा नहीं है। चलिए छोड़िए उन पुरानी बातों को और लौटते हैं मधोक जी पर…

बलराज मधोक जी का जन्म २५ फरवरी, १९२० को जम्मू काश्मीर राज्य के अस्कार्डू (अब गिलगिट-बल्तीस्तान, पाकिस्तान) में हुआ था। उनकी शिक्षा लाहौर विश्वविद्यालय से हुई। छात्रजीवन में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आये, और १९४२ में भारतीय सेना (कमीशन) का प्रस्ताव ठुकराते हुए उन्होने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में देश सेवा का व्रत ले लिया। उनके सारे कार्यों का दस्तावेज उनकी पुस्तकें हैं। बलराज जी बहुत अच्छे लेखक थे। उन्होंने हिंदी व अंग्रेजी में राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित अनेकों पुस्तकों की रचना की हैं, जिनके कुछ नाम हम यहाँ दे रहे हैं…

विभाजित भारत में मुस्लिम समस्या का पुनरोदय,
कश्मीर : जीत में हार,
खण्डित कश्मीर,
जीत या हार,
डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी – एक जीवनी,
कश्मीर : सेंटर ऑफ़ न्यू अलाइन्मेंट्स,
पाकिस्तान : आदि और अन्त,
Hindustan on the Cross Roads,
Portrait of a Martyr (Biography of Shyama Prasad Mukerjee),
Kashmir : The Storm Center of The World,
Bungling in Kashmir,
Kargil and Indo-Pak Relations,
Rationale of Hindu State, etc.

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