May 25, 2024

२ नवम्बर, २००० के दिन मणिपुर की राजधानी इंफाल के मालोम में असम राइफल्स के जवानों के हाथों १० बेगुनाह लोग मारे गए थे। इसके विरोध में इरोम ने ४ नवम्बर, २००० को अनशन शुरू किया, उन्हें यह उम्मीद थी कि १९५८ से अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, असम, नगालैंड, मिजोरम और त्रिपुरा के साथ १९९० से जम्मू-कश्मीर में लागू आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट को हटवाने में वह महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चल कर कामयाब होंगी।

अब आप सोच रहे होंगे की ये इरोम कौन है और यह मामला क्या है, तो आईए हम इरोम के साथ ही साथ इस पूरे मामले को संक्षेप में चर्चा करते हैं…

इरोम यानी इरोम चानू शर्मिला का जन्म १४ मार्च, १९७२ को कोंगपाल, इम्फाल, मणिपुर के रहने वाले पिता इरोम नंदा और माता इरोम ओंग्बी सखी के यहाँ हुआ था।

पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न हिस्सों आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट यानी एएफएसपीए कानून के तहत सुरक्षा बलों को किसी को भी देखते ही गोली मारने या बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार है। शर्मिला इसके खिलाफ इम्फाल के जस्ट पीस फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़कर भूख हड़ताल करने लगीं, यह हड़ताल लगभग १६ वर्षों तक यानी ४ नवम्बर, २००० से ९ अगस्त २०१६ तक चला। मगर भूख हड़ताल के दौरान सरकार ने शर्मिला को आत्महत्या के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया। मगर यह गिरफ्तारी एक साल से अधिक नहीं हो सकती थी अतः हर साल उन्हें रिहा करते ही दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाता था और नाक से लगी एक नली के जरिए उन्हें खाना दिया जाता था तथा इस के लिए पोरोपट के सरकारी अस्पताल के एक कमरे को उनके लिए अस्थायी जेल बना दिया गया था। हड़ताल के अंतिम सालों में यानी जस्ट पीस फाउंडेशन ट्रस्ट के जरिए शर्मिला को आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने मणिपुर की लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी के टिकट पर २०१४ के लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया मगर शर्मिला ने इसे अस्वीकार कर दिया।

बात जुलाई २०१६ की है जब अचानक ही शर्मिला ने घोषणा की कि वे शीघ्र ही अपना अनशन समाप्त कर देंगी। जब उनसे मीडिया ने कारण जानना चाहा तो उन्होंने अपने इस निर्णय का कारण आम जनता की संघर्ष के प्रति बेरुखी को बताया। ९ अगस्त, २०१६ का वो ऐतिहासिक दिन जब इरोम शर्मिला ने अदालत से निकलकर अपना अनशन खत्म करने का ऐलान किया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें शहद की एक शीशी दी। इरोम ने शीशी से थोड़ा सा शहद अपनी हथेली पर रखा और उसे देखकर वह भावुक हो गईं। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “मैं क्रांति की प्रतीक हूं। मैं मणिपुर की मुख्यमंत्री बनना चाहती हूं, ताकि अपने मुद्दों को राजनीति के जरिये उठा सकूं।” इरोम ने आगे कहा, “मुझे आज़ाद किया जाए। मुझे अजीब सी महिला की तरह देखा जा रहा है। लोग कहते हैं, राजनीति गंदी होती है, मगर समाज भी तो गंदा है। उन्होंने कहा, मैं सरकार के ख़िलाफ़ चुनाव में खड़ी होऊंगी। मैं सबसे कटी हुई थी। मैंने महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर अमल किया है। अब मुझे आज़ाद होना होगा। लोग मुझे इंसान के तौर पर क्यों नहीं देख सकते ? मैं अपील करती हूं कि मुझे आज़ाद किया जाए…

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