June 24, 2024

आधुनिक भारत के प्रसिद्ध चिन्तक एवं समाज विज्ञानी व लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र के प्राध्यापक तथा उपकुलपति रहे राधा कमल मुखर्जी जी का जन्म ७ दिसंबर, १८८९ को पश्चिमी बंगाल के मुर्शिदाबाद जनपद अंतर्गत एक छोटे से कस्बे बहरामपुर में हुआ था।

परिचय…

राधा कमल की प्रारम्भिक शिक्षा बहरामपुर के कृष्णनाथ कालेजिएट स्कूल से प्रारम्भ हुई। वर्ष १९०४ में माध्यमिक शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात् उच्च शिक्षा हेतु कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कालेज में प्रवेश लिया। वर्ष १९०८ में अंग्रेजी साहित्य, इतिहास तथा सामान्य विषय दर्शनशास्त्र के साथ स्नातक आनर्स की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनका शिक्षक बनने का लक्ष्य था अतः अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र विषय का चयन कर वे कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रवेश किया। यह वही साल था, जब कलकत्ता विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र विषय का स्नातकोत्तर स्तर का संयुक्त पाठ्यक्रम प्रारम्भ किया गया था। राधा कमल ने स्नातकोत्तर स्तर पर अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र का चयन अनायास ही नहीं किया था, बल्कि उनके ही शब्दों में ‘‘कलकत्ता की बस्तियों में दुःख·दरिद्रता, गंदगी और अधःपतन के साथ जो मेरा आमने-सामने परिचय हुआ उसने मेरी भविष्य रूचि को अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र की ओर आकर्षित किया।’’ देश एवं राष्ट्र के लिए अध्ययन के विचार से प्रभावित होकर उन्होंने स्नातकोत्तर स्तर पर अर्थशास्त्र विषय का चयन किया। उनका दृढ़ विश्वास था कि अर्थशास्त्र ही भारतीय दरिद्रता, शोषण एवं आधीनता जैसे गम्भीर मुद्दों के वैज्ञानिक एवं उचित उत्तर दे सकता है। उन्होंने २१ वर्ष की आयु में यानी वर्ष १९१० में एम.ए. अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। यह एक महान उपलब्धि ही कही जाएगी कि कलकत्ता विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र विषय की स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के प्रथम समूह में वह भी एक थे।

उपलब्धियां…

अपने आप में यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, प्रोफेसर मुखर्जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सर्वप्रथम लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्ष १९२१ में समाजशास्त्र का अध्ययन प्रारम्भ हुआ। इसलिए समाजशास्त्र के प्रणेता के रूप में वे उत्तर प्रदेश में विख्यात हैं।

वे इतिहास के अत्यन्त मौलिक दार्शनिक थे। वे २०वीं सदी के कतिपय बहुविज्ञानी सामाजिक वैज्ञानिकों में से एक थे जिन्होंने विभिन्न विषयों जैसे; अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मानवशास्त्र, परिस्थिति विज्ञान, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, साहित्य, समाजकार्य, संस्कृति, सभ्यता, कला, रहस्यवाद, संगीत, धर्मशास्त्र, अध्यात्म, आचारशास्त्र, मूल्य आदि विभिन्न अनुशासनों को अपना बहुमूल्य योगदान प्रदान किया है।

कृतियां…

उल्लेखित समस्त क्षेत्रों में प्रोफेसर मुखर्जी की अद्वितीय देन उनके द्वारा लिखित पचास अमर कृतियों में स्पष्टतः दृष्टिगोचर होती हैं।

१.The Fundamentals of Indian economics.
२.The culture and the art of India.

सम्मान…

भारत सरकार द्वारा उन्हें वर्ष १९६२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

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