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उपेन्द्र नाथ ‘अश्क’ – शूट२पेन
February 29, 2024

आज हम बात करने वाले हैं, उर्दू एवं हिन्दी के प्रसिद्ध कथाकार तथा उपन्यासकार उपेन्द्र नाथ ‘अश्क’ के बारे में।

परिचय….

उपेन्द्र नाथ ‘अश्क’ का जन्म १४ दिसम्बर, १९१० को पंजाब के जालन्धर में हुआ था। उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा लेते समय ही मात्र ११ वर्ष की आयु में ही पंजाबी में तुकबंदियाँ करने लगे थे। कला स्नातक होने के बाद उन्होंने अध्यापन का कार्य शुरू किया तथा विधि की परीक्षा विशेष योग्यता के साथ पास की।

साहित्यिक जीवन

अश्क जी ने अपना साहित्यिक जीवन उर्दू लेखक के रूप में शुरू किया था किन्तु बाद में वे हिन्दी के लेखक के रूप में ही जाने गए। वर्ष १९३२ में मुंशी प्रेमचन्द की सलाह पर उन्होंने हिन्दी में लिखना आरम्भ किया। वर्ष १९३३ में उनका उनका कहानी संग्रह ‘औरत की फितरत’ प्रकाशित हुआ, जिसकी भूमिका मुंशी प्रेमचन्द ने लिखी। उनका पहला काव्य संग्रह ‘प्रातः प्रदीप’ वर्ष १९३८ में प्रकाशित हुआ। बम्बई प्रवास में उन्होंने फ़िल्मों की कहानियाँ, पटकथाएँ, संवाद और गीत लिखे, तीन फ़िल्मों में काम भी किया किन्तु चमक-दमक वाली ज़िन्दगी उन्हे रास नहीं आई।

सम्मान

उनको वर्ष १९७२ में ‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

अपनी बात…

उपेंद्र नाथ ‘अश्क’ ने साहित्य की प्राय: सभी विधाओं में लिखा है, लेकिन उनकी मुख्य पहचान एक कथाकार के रूप में ही है। काव्य, नाटक, संस्मरण, उपन्यास, कहानी, आलोचना आदि क्षेत्रों में वे खूब सक्रिय रहे। इनमें से प्राय: हर विधा में उनकी एक-दो महत्वपूर्ण एवं उल्लेखनीय रचनाएं होने पर भी वे मुख्यत: कथाकार हैं। उन्होंने पंजाबी में भी लिखा है, हिंदी-उर्दू में प्रेमचंदोत्तर कथा-साहित्य में उनका विशिष्ट योगदान है। जैसे साहित्य की किसी एक विधा से वे बंधकर नहीं रहे उसी तरह किसी विधा में एक ही रंग की रचनाएं भी उन्होंने नहीं की। समाजवादी परंपरा का जो रूप अश्क के उपन्यासों में दृश्यमान होता है, वह उन चरित्रों के द्वारा उत्पन्न होता है जिन्हें उन्होंने अपनी अनुभव दृष्टि और अद्भुत वर्णन-शैली द्वारा प्रस्तुत किया है। अश्क के व्यक्ति चिंतन के पक्ष को देखकर यही कहा जा निकलता है कि उन्होंने अपने चरित्रों को शिल्पी की बारीक दृष्टि से तराशा है, जिसकी एक-एक रेखाओं से उसकी संघर्षशीलता का प्रमाण दृष्टिगोचर होता है। और फिर अंत में १९ जनवरी १९९६ को अश्क जी चिर निद्रा में लीन हो गए।

रचना संसार…

१. उपन्यास : गिरती दीवारें, शहर में घूमता आईना, गर्म राख, सितारों के खेल, आदि।
२. कहानी संग्रह : सत्तर श्रेष्ठ कहानियां, जुदाई की शाम के गीत, काले साहब, पिंजरा, अआड (?)।
३. नाटक : लौटता हुआ दिन, बड़े खिलाड़ी, जय-पराजय, स्वर्ग की झलक, भँवर, अंजो दीदी।
४. एकांकी संग्रह : अन्धी गली, मुखड़ा बदल गया, चरवाहे।
५. काव्य : एक दिन आकाश ने कहा, प्रातःप्रदीप, दीप जलेगा, बरगद की बेटी, उर्म्मियाँ, रिजपर (?)।
६. संस्मरण : मण्टो मेरा दुश्मन, फिल्मी जीवन की झलकियाँ
७. आलोचना : अन्वेषण की सहयात्रा, हिन्दी कहानी: एक अन्तरंग परिचय

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