ईमानदारी और बेबाकी के अप्रतिम शिखर पुरुष: पूर्व ‘कैग’ विनोद राय
”बीसीसीआई के लोगों ने अच्छा काम किया होता तो सुप्रीम कोर्ट को क्रिकेट में नहीं घुसना होता। हमारे देश में क्रिकेट एक धर्म है, उसकी सुरक्षा होना जरूरी है। मगर सुप्रीम कोर्ट के पास काफी तरह की बातें पहुंची हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जब मैं बीसीसीआई में गया तो बतौर नाइटवॉचमैन गया था। लेकिन २५ महीने से ही बैटिंग कर रहा हूं। मेरा काम है कि वहां चुनाव हो, लेकिन बीसीसीआई के ही कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं ताकि चुनाव ना हो और उनकी सीटें बच सकें।”
चलिए एक और ऐतिहासिक वाकये से आपको रूबरू कराता हूँ…
”सीएजी का यह मूलभूत और नैतिक दायित्व है कि वह सरकार के कामकाज में दखल न देते हुए भी आर्थिक मामलों में पायी गयी अनियमितताएँ उसे बताये ताकि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा की जा सके और सरकार पर नियन्त्रण बना रहे। यदि ऐसा नहीं किया गया तो यह देश की जनता के साथ विश्वासघात होगा।”
ये वे ऐतिहासिक और कड़े बोल हैं, जो भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) विनोद राय जी ने अलग-अलग समय पर, अलग-अलग वाकयों के संदर्भ में देश की जनता की जागृति के लिए मीडिया के माध्यम से कहे थे।
प्रारंभिक जीवन, शिक्षा और प्रशासनिक यात्रा
भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था को अपनी ईमानदारी से झकझोर देने वाले विनोद राय जी का जन्म २३ मई, १९४८ को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद में हुआ था। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि अत्यंत मेधावी रही है:
स्नातकोत्तर (अर्थशास्त्र): उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से अर्थशास्त्र में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की।
उच्च शिक्षा (हार्वर्ड): इसके अतिरिक्त, उन्होंने वैश्विक स्तर पर विख्यात हार्वर्ड विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन (Public Administration) में भी स्नातकोत्तर की उपाधि अर्जित की।
आईएएस करियर: १९७२ बैच के केरल कैडर के आई.ए.एस. अधिकारी रहे विनोद राय जी ने अपने सेवाकाल में देश के कई अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों पर अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाया।
भारत के ११वें ‘कैग’ के रूप में ऐतिहासिक कार्यकाल
विनोद राय जी की ख्याति देश के ११वें नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) के रूप में एक युगांतकारी अध्याय की तरह दर्ज है। इस सर्वोच्च संवैधानिक पद पर वे ७ जनवरी, २००८ से २२ मई, २०१३ तक रहे। इसी कार्यकाल के दौरान यूपीए सरकार के समय हुए लाखों करोड़ रुपये के ‘टूजी (2G) स्पेक्ट्रम घोटाला’ और ‘कोयला घोटाला’ (CoalGate) की जांच कर उन्होंने जो सनसनीखेज और निष्पक्ष रिपोर्टें देश के सामने रखीं, उसने भारतीय राजनीति की नींव हिला दी। इन प्रामाणिक रिपोर्टों के कारण वे तत्कालीन सत्तासीनों और भ्रष्ट राजनीति के इकलौते और सबसे बड़े दुश्मन बन गए थे।
सुप्रीम कोर्ट का अटूट विश्वास: उनकी ईमानदारी, अटूट बेबाकी और पारदर्शी कार्यशैली का ही प्रभाव था कि माननीय उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) देश में होने वाली हर बड़ी अनियमितता की जांच और सुधार के लिए विनोद जी की ही नियुक्ति करना चाहता था। इसी विश्वास के तहत, बीसीसीआई (BCCI) में मचे घमासान, अनियमितताओं को दूर करने और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें ही प्रशासकों की समिति (CoA) का प्रधान बनाकर भेजा था।
विद्वान सर्वत्र पूज्यते: वैश्विक पटल पर पहचान
यह बिल्कुल सत्य है कि इस देश में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए एक बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है; व्यक्ति को अनगिनत झूठे आरोपों, प्रत्यारोपों और मानसिक संघर्षों के दौर से गुजरना पड़ता है। परंतु सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। हमारे शास्त्रों में कहा गया है—
”स्वदेशे पूज्यते राजा, विद्वान सर्वत्र पूज्यते।”
अर्थात, राजा की पूजा तो केवल उसके अपने देश में होती है, परंतु विद्वान और कर्मठ व्यक्ति की पूजा संपूर्ण संसार में की जाती है। विनोद राय जी ने अपनी अद्भुत प्रशासनिक काबिलियत और साख के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का मस्तक ऊंचा किया और वे संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के बाहरी लेखापरीक्षकों के अध्यक्ष (Chairman of the UN Panel of External Auditors) के पद को भी सुशोभित कर चुके हैं।
निष्कर्ष: एक सच्चे राष्ट्रसेवक को नमन
एक ऐसे महान अर्थशास्त्री, निर्भीक नौकरशाह और व्यवस्था को आईना दिखाने वाले शलाका-पुरुष को अश्विनी राय ‘अरुण’ का बारम्बार सादर नमन। देश को आज ऐसे ही नायकों की महती आवश्यकता है जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर व्यवस्था में सुधार का शंखनाद कर सकें।
धन्यवाद!
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