वो भी क्या मुसाफ़िरी, जो बस मंज़िल तक पहुँचा दे, मज़ा तो उस रास्ते...
(Hindi Poetry)
एक नई सुबह का वादा बीते साल की धुंधली यादें, आँखों के कोरों...
UBI Contest ९९ कभी मन बहलाने को जो लिखे थे देखे तो वो...