July 23, 2024

ॐ धन्वंतरये नमः॥

धनवंतरी भगवान विष्णु के अंश अवतार हैं। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक कहा जाता है। इनका पृथ्वी लोक पर अवतरण समुद्र मंथन के समय हुआ था। शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धन्वंतरी, चतुर्दशी को काली माता और अमावस्या को भगवती महालक्ष्मी जी का सागर से प्रादुर्भाव हुआ था। इसीलिये दीपावली के दो दिन पूर्व धनतेरस को भगवान धन्वंतरी का अवतरण दिवस के रूप में धनतेरस मनाया जाता है। इसी दिन भगवान धनवंतरी ने आयुर्वेद का भी प्रादुर्भाव किया था। इन्‍हें भगवान विष्णु का रूप कहते हैं जिनकी चार भुजायें हैं। उन्होंने ऊपर की दोंनों भुजाओं में शंख और चक्र धारण किये हुये हैं। जबकि दो अन्य भुजाओं मे से एक में जलूका और औषध तथा दूसरे मे अमृत कलश लिये हुये हैं। इनका प्रिय धातु पीतल माना जाता है। इसीलिये धनतेरस को पीतल आदि के बर्तन खरीदने की परंपरा भी है। इन्‍हे आयुर्वेद की चिकित्सा करनें वाले वैद्य आरोग्य का देवता कहते हैं। इन्होंने ही अमृतमय औषधियों की खोज की थी।

कालांतर में इनके वंश में दिवोदास हुए जिन्होंने ‘शल्य चिकित्सा’ का विश्व का पहला विद्यालय काशी में स्थापित किया जिसके प्रधानाचार्य सुश्रुत बनाये गए थे। सुश्रुत दिवोदास के ही शिष्य और ॠषि विश्वामित्र के पुत्र थे। उन्होंने ही सुश्रुत संहिता लिखी थी। सुश्रुत विश्व के पहले सर्जन (शल्य चिकित्सक) थे। दीपावली के अवसर पर कार्तिक त्रयोदशी-धनतेरस को भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं।

त्रिलोकी के व्योम रूपी समुद्र के मंथन से उत्पन्न विष का महारूद्र भगवान शंकर ने विषपान किया, धन्वंतरि ने अमृत प्रदान किया और इस प्रकार काशी कालजयी नगरी बन गयी।

महिमा…

वैदिक काल में जो महत्व और स्थान अश्विनी कुमार को प्राप्त था वही पौराणिक काल में भगवान धनवंतरी को प्राप्त हुआ। जहाँ अश्विनी कुमार के हाथ में मधुकलश था, वहीं धनवंतरी को अमृत कलश मिला, क्योंकि भगवान विष्णु संसार की रक्षा करते हैं अत: रोगों से रक्षा करने वाले धनवंतरी को विष्णु का अंश माना गया। विषविद्या के संबंध में कश्यप और तक्षक का जो संवाद महाभारत में आया है, वैसा ही धनवंतरी और नागदेवी मनसा का ब्रह्मवैवर्त पुराण में आया है। उन्हें गरुड़ का शिष्य कहा गया है…

सर्ववेदेषु निष्णातो मन्त्रतन्त्र विशारद:।
शिष्यो हि वैनतेयस्य शंकरोस्योपशिष्यक:।।

प्रथा अथवा त्योहार…

हिंदू…

कार्तिक माह (पूर्णिमान्त) की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंन्थन के समय भगवान धनवंतरी के अमृत कलश को लेकर प्रकट होने के कारण, इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है।

जैन…

जैन आगम में धनतेरस को ‘धन्य तेरस’ या ‘ध्यान तेरस’ भी कहते हैं। भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

भारत सरकार…

भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

विशेष…

धनतेरस के दिन दीप जलाकर भगवान धनवंतरी की पूजा करनी चाहिए तथा भगवान धनवंतरी से स्वास्थ और सेहतमंद बनाये रखने हेतु प्रार्थना करनी चाहिए। चांदी का कोई बर्तन अथवा लक्ष्मी गणेश अंकित चांदी का सिक्का अथवा नए बर्तन खरीदने की प्रथा है। जिसमें दीपावली की रात भगवान श्री गणेश व देवी लक्ष्मी के लिए भोग चढ़ाया जाता है। समुद्र मन्थन के दौरान भगवान धनवंतरी और मां लक्ष्मी का अवतरण हुआ था, इसी वजह से धनतेरस को भगवान धनवंतरी और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धनतेरस दीपावली के दो दिन पहले मनाया जाता है।

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