श्री वैकम मुहम्मद बशीर

बशीर उत्तरी त्रावणकोर के तलयोलपर्ंब में पैदा हुए थे। वह अपने माता-पिता के बडे बेटे थे। उनके पिता जी का इमारती लकड़ियों का व्यवसाय था, मगर उससे उनके पूरे परिवार का गुज़ारा नहीं हो पाता था। एक साधारण मलयालमी माध्यम के स्कूल में अपनी शिक्षा की शुरुआत हुई और उसके बाद कुछ समय अंग्रेजी माध्यम के स्कूल मे पढाई हुई। यह वही समय था जब वो इसी स्कूल में वह महात्मा गांधी के प्रभाव मे आ गये थे और स्वदेशी आदर्शों से प्रेरित होकर उन्होंनें खद्दर पहनना शुरू कर दिया। जब गाँधी वैकम सत्याग्रह् में भाग लेने के लिए आये तों बशीर उन्हें देखने गये। जिस कार मे गाँधी यात्रा कर रहे थे, बशीर उस पर चढ़े गए और उनके हाथ को छुआ। वह हर रोज़ गांधी के सत्याग्रह आश्रम जाते थे जिस वजह से विद्यालय जाने में देर हो जाती और सज़ा भी मिलती थी। रोज की सजा से परेशान उन्होने विद्यालय छोड़ कर, स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने का निर्णय ले लिया।

त्रावणकोर मे कोई स्वतंत्रता आंदोलन ना होने के कारण, वह मालाबार सत्याग्रह में भाग लेने के लिए गये। सत्याग्रह मे भाग लेने से पहले ही उनका संघ गिरफ्तार हो गया। बशीर को तीन महीने की कैद की सजा सुनाई गयी और कन्नूर के जेल में भेजा गया। वह कन्नूर जेल में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु, जैसे क्रांतिकारियों की वीरता की कहानियों को सुनकर प्रेरित हो गये। गांधी-इर्विन समझौता मार्च १९३१ के बाद उनके साथ साथ लगभग ६०० राजनैतिक कैदियों को रिहा किया गया। जेल से रिहा होने के बाद उन्होने एक अंग्रेज-विरोधी आंदोलन का आयोजन किया और एक क्रांतिकारी जर्नल उज्जीवनम (‘विद्रोह’) संपादित करना शुरू कर दिया जिसकी वजह से उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी कर दिया गया।

यह थे दक्षिण भारत के स्वतंत्रता संग्राम ध्वजवाहक…

श्री वैकम मुहम्मद बशीर
जन्म – २१ जनवरी, १९१० वे मलयालम के वरिष्ठ साहित्यकार थे उन्होने अनर्थ निमिष, जन्मदिन, मूर्खों का स्वर्ग, मेरे दादा का हाथी आदि उनकी २५ से अधिक पुस्तकें लिखी जो प्रकाशित हो चुकी हैं। बशीर अप्रचलित भाषा श्रेणी के प्रमुख साहित्यकार हैं। वे साहित्यिक भाषा और आम आदमी के भाषा में अंतर नही रखते थे। अगर कोई व्याकरण त्रुटि भी आये तो वो ध्यान नहीं देते थे। पहले-पहले उनकी रचनाओं में इस प्रकार की भाषा को प्रकाशकों ने भी स्वीकार नही किया, इसलिए वे लोग उनकी रचनाओं में बदलाव और संशोधन चाहते थे। जब बशीर ने इन रचनाओं को अपनी असली शैली से दूसरी मलयालम शैली में परिवर्तित करते हुए देखा तो, उन्हें बहुत गुस्सा आया क्योंकि उसमे स्वाभिकता और शीतलता बिलकुल नहीं थी। उन्होनें प्रकाशकों को अपनी असली रचनाओं को प्रकाशित करने के लिये जबरदस्ती बोला। बशीर के एक भाई, जो एक अध्यापक थे, उनका नाम अबदूल खादर था। एक बार वो बशीर की एक कहानी पढ रहे थे, तब उन्होंने बशीर से पूछा “इस मे कहा आक्यास और आक्याथास (यह एक मल्यालम पद है) है?”। तब बशीर ने उनको जवाब दिया कि “मैं जो लिखता हूँ वो असली मलयालम भाषा है, इसलिए आक्यास और आक्याथास् मत ढूँढो”। यह दिखाता है कि बशीर व्याकरण के ऊपर ध्यान नही देते थे बल्कि अपनी देशीय भाषा के ऊपर ध्यान देते थे। वे खुद का मज़ाक उडाते थे कि उनको मलयालम नहीं आती है मगर उन्हें मलयालम भाषा की बहुत अच्छी जानकारी थी। वे साहित्य अकादमी के वरिष्ठ पदों पर भी अपनी सेवा दे चुके थे।

ऐसे साहित्यिक दिगदर्सि के जन्मदिवस पर अश्विनी राय ‘अरुण’ का नमन ! वंदन!

धन्यवाद !

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

Similar Articles

Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Advertisment

Instagram

Most Popular

पंचगंगा घाट

काशी की बसावट के लिहाज से शहर के उत्तरी छोर से गंगा की विपरीत धारा की ओर चलें तो आदिकेशव घाट व राजघाट के...

आदिकेशव घाट

काशी में गंगा तट पर अनेक सुंदर घाट बने हैं, ये सभी घाट किसी न किसी पौराणिक या धार्मिक कथा से संबंधित हैं। काशी...

मामा जी की स्मृति से

अपने बेटों से परेशान होकर एक महोदय कैंट स्टेशन के एक बैंच पर सोए हुए थे। उन्हें कहीं जाना था, मगर कहां यह उन्हें...