कभी बचपन के पास से
गुज़रकर तो देखो,
बचपना आ जाएगा।
कभी पचपन के पास
बैठकर तो देखो,
जीना आ जाएगा।
कभी किसी स्त्री की
बात सुनकर तो देखो,
महकना आ जाएगा।
कभी गरीब के साथ
एक कदम चलकर तो देखो,
कीमत जानना आ जाएगा।
कभी अमीर के पास
बैठकर तो देखो,
समय गुज़ारना आ जाएगा।
कभी किसी भिखारी से
मिलकर तो देखो,
रोटी खाना आ जाएगा।
कभी भगवान को
नमन करके तो देखो,
विचार करना आ जाएगा।