July 22, 2024

अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला कल्पना चावला का जन्म पिता श्री बनारसी लाल चावला और माता संजयोती देवी के यहाँ १७ मार्च, १९६२ को हरियाणा के करनाल में हुआ था। कल्पना चार भाई बहनो में सबसे छोटी थी अतः सभी की प्यारी थी, छोटी कल्पना को प्यार से लोग मोंटू कहते थे। कल्पना जब आठवी कक्षा में थीं तो उन्होंने इंजिनयर बनने की अपनी इच्छा प्रकट की। माँ ने अपनी बेटी की भावनाओं का समर्थन किया जबकी पिता चिकित्सक अथवा शिक्षिका बनाना चाहते थे। कल्पनाशील कल्पना को बचपन से ही अंतरिक्ष लुभाता था। कल्पना की प्रेरणास्रोत जहाँगीर रतनजी दादाभाई टाटा थे, जो एक बड़े व्यवसाई होने के साथ ही साथ एक बेहतरीन विमान चालक भी थे।

बहुत सारी उठापटक, शिक्षा नौकरी आदि के बाद अंततः कल्पना नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल हुईं। उनका पहला अंतरिक्ष मिशन छह अंतरिक्ष यात्री दल के साथ अंतरिक्ष शटल कोलंबिया की उड़ान एसटीएस-८७ से शुरू हुआ। कल्पना अपने पहले मिशन में १.०४ करोड़ मील का सफ़र तय कर के पृथ्वी की २५२ परिक्रमाएँ कीं और अंतरिक्ष में ३६० घंटे से अधिक समय बिताए। एसटीएस-८७ के उड़ान के बाद अंतरिक्ष कार्यालय के तकनीकी पदों पर काम किया।

कल्पना चावला एक बात हरदम कहा करती थीं, “मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूँ। प्रत्येक पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए ही मरूँगी।” अफसोस यह बात सच साबित होना था, जो सच हो गया…

बात वर्ष २००० की है, जब कल्पना को एसटीएस-१०७ में अंतरिक्ष की दूसरी उड़ान के लिए चुना गया। फिर आया १६ जनवरी, २००३, जब कल्पना ने कभी ना खत्म होने वाली एसटीएस-१०७ मिशन की शुरुआत की। कोलंबिया अंतरिक्ष यान में उनके साथ… कमांडर रिक डी. हुसबंद, पायलट विलियम स. मैकूल, कमांडर माइकल प. एंडरसन, इलान रामों, डेविड म. ब्राउन और लौरेल बी. क्लार्क थे।

अंतरिक्ष पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा ही उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई। सभी तरह के अनुसंधान तथा विचार – विमर्श के उपरांत, अपनी वापसी यात्रा के समय पृथ्वी के वायुमंडल में अंतरिक्ष यान के प्रवेश के वक्त जो घटना घटी वह दुःखद इतिहास बन गया। १ फरवरी, २००३ को कोलंबिया अंतरिक्षयान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया। देखते ही देखते अंतरिक्ष यान और उसके सातों यात्रियों के अवशेष टेक्सास शहर पर बरसने लगे। एक अभियान का अंत भीषण दुःखद हो गया।

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