किताबों की सूखी हुई वो महक याद है, बिना बात के ही खिलखिलाना याद...
AshwiniRaiArun
सवाल खड़ा सामने, बनकर कठिन सवाल, ‘हाँ’ और ‘ना’ के बीच, फंसा हुआ है...
अब स्याही की ज़रूरत क्या, जब चिप में सारा ज्ञान है? लेखक की उस...
दो आँखों से देखा हमने, बस दुनिया का मेला है, छल, कपट और भीड़...
सन्नाटा है रात का, पर रौशन घर का कोना है, नींदों को कुछ दिन...
पास बैठे हैं सब, पर कोई पास नहीं, धड़कनों में अब पहले जैसी प्यास...
भय प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी, बक्सर की इस पावन रज पर, छटा अलौकिक...
गीत: श्रद्धा का संवाद (स्थायी) ए पुजारी रे! काहे को तू पूजा करत है?...
न जाने वो कहाँ चली गयी बिन उसके जीवन सजा हो गयी ...
कितने झंझावात आते, सबको उसने झेला था। जितने बाधा, कंटक आते, सबसे उसने खेला...