पास बैठे हैं सब, पर कोई पास नहीं, धड़कनों में अब पहले जैसी प्यास...
AshwiniRaiArun
भय प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी, बक्सर की इस पावन रज पर, छटा अलौकिक...
गीत: श्रद्धा का संवाद (स्थायी) ए पुजारी रे! काहे को तू पूजा करत है?...
न जाने वो कहाँ चली गयी बिन उसके जीवन सजा हो गयी ...
कितने झंझावात आते, सबको उसने झेला था। जितने बाधा, कंटक आते, सबसे उसने खेला...
यदि दुनिया गुलाबी होती, तो जगत सजीवन होता। मानव सादगी से भरे होते,...
रत्नाकर: दस्यु से महर्षि तक का पथ जिंदगी के बीहड़ में जब, मति...
कुरुक्षेत्र: अंतर्द्वंद्व का महासमर गांधारी गम के सागर में डूबी, अपने ममता के...
अंतर्द्वंद्व की परछाइयाँ मेरा लक्ष्य क्या पैसा है? मुझे पता नहीं! मेरा...
॥ यूं ही जिंदगी हाथों से ॥ ॥ फिसलती जा रही है, ॥ ॥...