श्रीमंत विश्वासराव

आज एक बार फिर से मराठा साम्राज्य के एक योद्धा के बारे में चर्चा करेंगे। वे पेशवा बालाजी बाजीराव का सबसे बड़ा पुत्र थे और बड़ा होने के कारण रिवाज के मुदाबिक वही मराठा साम्राज्य के अगले उत्तराधिकारी भी थे। वे चाहते तो पेशवा बालाजी बाजीराव के बाद आराम से अगले पेशवा बन सकते थे, परंतु अहमदशाह अब्दाली के आक्रमण को रोकने के लिये उन्होंने पेशवा से स्वयं को भेजने की गुजारिश की, उन्हें पेशवाई थाली में सजाकर पाने की कोई इच्छा नहीं थी। वह चाहते थे कि अपने सेनापतित्व में इस युद्ध को जीतकर अपनी उपयोगिता को सिद्ध करें। जिस वजह से उन्हें १७ वर्ष की अवस्था में मराठा सेना का प्रधान सेनापति नियुक्त कर उत्तर भारत भेजा गया। परंतु इस अभियान का अन्त १३ जनवरी, १७६१ को पानीपत के तृतीय युद्ध में विश्वासराव के मारे जाने के बाद हो गया और इतिहास की सबसे बड़ी हार मराठों की हुई।

परिचय…

बालाजी बाजी राव के सबसे बड़े बेटे विश्वासराव का जन्म २२ जुलाई, १७४२ को पुणे के पास सुपे में यानी शाहजी की जागीर में हुआ था। उन्हें बचपन से ही प्रशासनिक मामलों में प्रशिक्षित किया गया था और ८ वर्ष की अल्प आयु से ही सैन्य प्रशिक्षण से अवगत कराया जाने लगा। क्योंकि वह बिल्कुल अपने दादा पेशवा बाजीराव के छोटे स्वरूप की तरह दिख रहा था। प्रसिद्ध इतिहासकार जीएस सरदेसाई लिखते हैं कि विश्वराव की तुलना में पेशवा परिवार में कोई भी अधिक सुंदर नहीं था। पानीपत बखर के लेखकों में से एक रघुनाथ यादव ने कहा था, “पुरुषत्व विश्वास आस्था” (“सभी पुरुषों के बीच सबसे सुंदर।” विश्वासराव का विवाह २ मई, १७५० को लक्ष्मीबाई से हुआ था, जो हरि बालकृष्ण दीक्षित-पटवर्धन की बेटी थीं।

प्रशिक्षण…

श्रीमंत विश्वासराव ने ८ वर्ष की आयु से ही प्रशासन और युद्ध में प्रशिक्षण प्राप्त किए थे। उनकी विशेषता तलवार और धनुर-विद्या में थी। विश्वासराव की दिनचर्या में कसरत करना सदैव से रहा।

पानीपत युद्ध तृतीय…

जैसा कि हमने ऊपर ही कहा है, अहमदशाह अब्दाली के आक्रमण को रोकने के लिये विश्वासराव ने पेशवा से स्वयं को भेजने की गुजारिश की। वह चाहते थे कि वे अपने सेनापतित्व में इस युद्ध को जीतकर अपनी उपयोगिता को सिद्ध करें। जिस वजह से उन्हें १७ वर्ष की अवस्था में मराठा सेना का प्रधान सेनापति नियुक्त कर उत्तर भारत भेजा गया। जबकि सच्चाई यह है कि १४ जनवरी, १७६१ को इस युद्ध में मराठा सेना का प्रतिनिधित्व सदाशिवराव भाऊ ने किया, विश्वासराव नाममात्र के सेनापति थे। यूरोपीय तकनीक पर आधारित मराठों की पैदल सेना एवं तोपखाने की टुकड़ी की कमान इब्राहिम ख़ाँ गार्दी के हाथों में थी। प्रारम्भिक सफलता के अतिरिक्त युद्ध का समस्त परिणाम मराठों के लिए भयानक रहा। मल्हारराव होल्कर युद्ध के बीच में ही भाग निकला और मराठा फ़ौज पूरी तरह से उखड़ गयी। विश्वासराव एवं सदाशिवराव भाऊ के साथ अनेक महत्त्वपूर्ण मराठे सैनिक इस युद्ध में मारे गये। इस बारे में इतिहासकार ‘जे.एन. सरकार’ ने लिखा है, ‘महाराष्ट्र में सम्भवतः ही कोई ऐसा परिवार होगा, जिसने कोई न कोई सगा सम्बन्धी न खोया हो, तथा कुछ परिवारों का तो विनाश ही हो गया।’

विश्लेषण…

पानीपत के इस युद्ध ने यह निर्णय नहीं किया कि भारत पर कौन राज्य करेगा अपितु यह तय कर दिया कि भारत पर कौन शासन नहीं करेगा। मराठों की पराजय के बाद ब्रिटिश सत्ता के उदय का रास्ता क़रीब-क़रीब साफ़ हो गया। अप्रत्यक्ष रूप से सिक्खों को भी मराठों की पराजय से फ़ायदा हुआ। इस युद्ध ने मुग़ल सम्राट को लगभग निर्जीव सा कर दिया, जैसा कि बाद के कुछ वर्ष सिद्ध करते हैं। पानीपत के युद्ध में विश्वासराव की मृत्यु के सदमें को न सह पाने के कारण बालाजी बाजीराव की कुछ दिन बाद मृत्यु हो गई। पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठों के पराजय की सूचना बालाजी बाजीराव को एक व्यापारी द्वारा कूट सन्देश के रूप में पहुँचायी गयी थी, जिसमें कहा गया कि, ‘दो माती विलीन हो गये, बाइस सोने की मुहरें लुप्त हो गईं और चांदी तथा तांबे की तो पूरी गणना ही नहीं की जा सकती।’

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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