February 23, 2024

भोजपुरी का शेक्सपियर,

कवि, गीतकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, लोक संगीतकार और अभिनेता यानी कि…

भिखारी ठाकुर, भोजपुरी के समर्थ लोक कलाकार, रंगकर्मी लोक जागरण के सन्देश वाहक, लोक गीत तथा भजन कीर्तन के अनन्य साधक। भिखारी ठाकुर बहुआयामी प्रतिभा एवं सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। वे भोजपुरी गीतों एवं नाटकों के साथ ही साथ अपने सामाजिक कार्यों के लिये भी प्रसिद्ध थे। महान लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की मातृभाषा भोजपुरी थी और उन्होंने भोजपुरी को ही अपने काव्य और नाटक की भाषा बनाया।

परिचय…

भिखारी ठाकुर का जन्म १८ दिसम्बर, १८८७ को बिहार के सारन जिले के कुतुबपुर (दियारा) गाँव के एक नाई परिवार में हुआ था। उनके पिताजी का नाम दल सिंगार ठाकुर व माताजी का नाम शिवकली देवी था।

पढ़ाई लिखाई से दूर वे जीविका कि तलाश में गाँव से दूर खड़गपुर चले गये। मगर वह स्थान उन्हें कभी संतुष्ट नहीं कर सका। भगवान श्रीराम की कृपा थी, उनका मन रामलीला में बस गया। अतः इसके बाद वे जगन्नाथ पुरी चले गये।

कालांतर में वे अपने गाँव आ गए और वहीं उन्होने एक नृत्य मण्डली बनायी और रामलीला करने लगे। इसके साथ ही उन्होने नाटक लिखना, गीत लिखना एवं साथ ही पुस्तकों का लेखन आरम्भ कर दिया। उनकी पुस्तकों की भाषा बहुत सरल थी जिससे जनमानस बेहद आकृष्ट हुए। उनके द्वारा लिखित पुस्तक वाराणसी, हावड़ा एवं छपरा से प्रकाशित हुईं।

विरासत …

भिखारी ठाकुर को भोजपुरी समाज, भाषा एवं संस्कृति का वाहक माना जाता है। भोजपुरी भाषा झारखंड, पूर्वी उत्तरप्रदेश और बंगाल के कुछ हिस्सों के साथ बिहार के तकरीबन सभी हिस्सों में व्यापक रूप से बोली जाती है। अतः भिखारी ठाकुर इस भाषाई क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय हैं तथा साथ ही वे उन शहरों में भी जहां बिहारी श्रमिक अपनी आजीविका के लिए चले गए उन्हें वहां भी प्रसिद्धि मिली। इतना ही नहीं वे और उनकी प्रसिद्धि, उनके नाटक, गीत आदि ने देश की सभी सीमाएं तोड़कर मॉरीशस, केन्या, सिंगापुर, नेपाल, ब्रिटिश, गुयाना, सूरीनाम, युगांडा, म्यांमार, मैडागास्कर, दक्षिण अफ्रीका, फिजी, त्रिनिडाड और अन्य जगहों पर भी परचम लहराया है। इससे साफ जाहिर है कि भोजपुरी और भोजपुरिया मिठास किसी भी सरहद से परे है। और ऐसा भिखारी ठाकुर की वजह से हो सका है।

कुछ मुख्य कृतियाँ…

लोकनाटक…

१. बिदेशिया
२. भाई-बिरोध
३ बेटी-बियोग या बेटि-बेचवा
४. कलयुग प्रेम
५. गबर घिचोर
६. गंगा स्नान (अस्नान)
७. बिधवा-बिलाप
८. पुत्रबध
९. ननद-भौजाई
१०.बहरा बहार,
११.कलियुग-प्रेम,
१२.राधेश्याम-बहार,
१३.बिरहा-बहार,
१४.नक़ल भांड अ नेटुआ के

अन्य…

शिव विवाह, भजन कीर्तन: राम, रामलीला गान, भजन कीर्तन: कृष्ण, माता भक्ति, आरती, बुढशाला के बयाँ, चौवर्ण पदवी, नाइ बहार, शंका समाधान, विविध।

और अंत में…

आज भिखारी ठाकुर नहीं हैं, उनका निधन १० जुलाई, १९७१ को चौरासी वर्ष की आयु में हो गया। उनकी मृत्यु के बाद थिएटर शैली की उपेक्षा हुई और आज भी हो रही लेकिन फिर भी, इसने अपना अलग आकार ले लिया है। उनकी ‘लौंडा डांस’ शैली बेहद लोकप्रिय हो गई है। बिहार शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां एक पुरुष महिला जैसी वेशभूषा में महिलाओं के वस्त्र पहन कर नृत्य करता है। और यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार्य भी है।

भिखारी

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