July 22, 2024

सुन्दरलाल शर्मा (Sundarlal Sharma)

आज हम बात करेंगे बहुमुखी प्रतिभा के धनी, सामाजिक क्रांति के अग्रदूत तथा छत्तीसगढ़ के जनजागरणकर्ता साथ ही एक कवि, सामाजिक कार्यकर्ता, इतिहासकार तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री सुन्दरलाल शर्मा जी के बारे में। जिन्हें ‘छत्तीसगढ़ का गाँधी’ की उपाधि दी गई है।

परिचय…

सुन्दरलाल शर्मा जी का जन्म २१ दिसम्बर, १८८१ को छत्तीसगढ़ की धार्मिक नगरी राजिम के निकट महानदी के तट पर बसे ग्राम चंद्रसूर में हुआ था। इनकी शिक्षा घर पर ही हुई थी। कहीं अन्यत्र जाए बिना ही इन्होंने अपने स्वाध्याय से संस्कृत, बांग्ला तथा उड़िया आदि भाषाएं भी जानी।

कालांतर में यानी १९वीं सदी के अंतिम चरण में, संपूर्ण विश्व समेत हमारे देश में भी राजनैतिक और सांस्कृतिक चेतना की लहरें जब पूरे चरमपर उठ रही थीं। समाज सुधारकों, चिंतकों समेत हमारे देशभक्तों ने परिवर्तन के इस दौर में समाज को नयी सोच और दिशा दिलाने में प्रयत्नशील थे, तब सुन्दरलाल शर्मा कहां पीछे रहने वाले थे। उन्होंने भी अपनी जन्मस्थली समेत छत्तीसगढ़ में सामाजिक चेतना का स्वर घर-घर तक पहुंचाने में अविस्मरणीय कार्य किया। वे ‘राष्ट्रीय कृषक आंदोलन’, ‘मद्यनिषेध’, ‘आदिवासी आंदोलन’, ‘स्वदेशी आंदोलन’ से जुड़े और स्वतंत्रता के यज्ञवेदी पर अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

सामाजिक एवं राष्ट्रीय योगदान…

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में व्याप्त रुढ़िवादिता, अंधविश्वास, अस्पृश्यता तथा कुरीतियों को दूर करने के लिए आदरणीय सुन्दरलाल शर्मा जी ने अथक प्रयास किया। उनके हरिजनोद्धार कार्य की प्रशंसा महात्मा गाँधी ने मुक्त कंठ से करते हुए इस कार्य में इन्हें अपना गुरू माना था। वर्ष १९२० में धमतरी के पास ‘कंडेल नहर सत्याग्रह’ इनके नेतृत्व में ही सफल रहा था। इनके अनुरोध पर ही गाँधी जी २० दिसम्बर, १९२० को पहली बार रायपुर आए थे।

जिस प्रकार उन दिनों समाजसेवी, देशभक्तों को उनके कार्य के उपहारस्वरूप जेल जाना पड़ता था, उसी प्रकार सुंदरलाल शर्मा जी को भी उनके ‘असहयोग आन्दोलन’ में सहभागिता के लिए जेल जाना पड़ा।

लेखन कार्य…

सुन्दरलाल शर्मा जी किशोरावस्था से ही कविता, लेख तथा नाटक आदि की रचना करने लगे थे। वे भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों को मिटाने के लिए शिक्षा के प्रचार-प्रसार को आवश्यक समझते थे। उन्होंने हिन्दी भाषा के साथ छत्तीसगढ़ी को भी काफ़ी महत्व दिया। पण्डित सुन्दरलाल शर्मा जी ने हिन्दी तथा छत्तीसगढ़ी में लगभग १८ ग्रंथों की रचना की, जिसमें ‘छत्तीसगढ़ी दान-लीला’ उनकी चर्चित कृति है।

और अंत में…

जीवन-पर्यन्त सादा जीवन, उच्च विचार के आदर्श का पालन करने वाले। सदैव समाज सेवा में रत रहने वाले श्री सुन्दरलाल शर्मा जी का देहांत २८ दिसम्बर, १९४० को अत्यधिक परिश्रम के कारण हुआ। छत्तीसगढ़ सरकार ने उनकी स्मृति में साहित्य/आंचिलेक साहित्य के लिए ‘पण्डित सुन्दरलाल शर्मा सम्मान’ स्थापित किया है।

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