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अंतरिक्ष विज्ञान के मौन साधक डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता: पीएसएलवी और भारतीय एवियोनिक्स के शिल्पकार

​लेखक: विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’

 

​प्रस्तावना: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के आधार स्तंभ

​जब भी भारत के अंतरिक्ष अभियानों और उपग्रह प्रक्षेपण यानों की सफलता की गाथा लिखी जाएगी, उसमें डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता का नाम अग्रिम पंक्ति में अंकित रहेगा। वे स्वचालित नियंत्रण (Automatic Control), उपकरण (Instrumentation) और अंतरिक्ष प्रणाली विश्लेषण (Space System Analysis) के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान देने वाले भारत के एक शीर्षस्थ अंतरिक्ष इंजीनियर और वैज्ञानिक थे। डॉ. एस. सी. गुप्ता उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में शामिल थे, जो भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की स्थापना के शुरुआती दिनों से ही इसके साथ पूरी निष्ठा से जुड़े रहे और देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाया।

 

​जन्म, उच्च शिक्षा और देश वापसी

​डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता का जन्म ७ जनवरी, १९३४ को हुआ था। वे बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के धनी थे।

​शुरुआती अकादमिक सफर: उन्होंने अपनी प्रारंभिक उच्च शिक्षा के तहत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से विज्ञान स्नातक (B.Sc.) की उपाधि प्राप्त की। इसके पश्चात, उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बैंगलोर से डीआईआईएससी (DIISc) की डिग्री हासिल की।

​विदेशी धरती पर शोध और मातृभूमि की पुकार: अपनी मेधा के बल पर वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए, जहाँ उन्होंने पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट (Ph.D.) की उपाधि प्राप्त की। अमेरिका में उज्ज्वल भविष्य की असीम संभावनाओं के बाद भी, मातृभूमि की सेवा के लिए वे सन १९६५ में भारत लौट आए।

 

​डॉ. विक्रम साराभाई के साथ कॅरियर की शुरुआत

​सन १९६५ में स्वदेश वापसी के बाद डॉ. गुप्ता ने तिरुवनंतपुरम में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और विकास की सुविधाओं की रूपरेखा तैयार करने और उन्हें स्थापित करने में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। उन्होंने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) (जो उस समय स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर – SSTC के नाम से जाना जाता था) में अपने ऐतिहासिक कॅरियर का श्रीगणेश किया।

 

​एएसएलवी, पीएसएलवी और औद्योगिक सहयोग में महती योगदान

​डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता का मुख्य कार्य अंतरिक्ष यानों के मस्तिष्क यानी उनकी नियंत्रण, मार्गदर्शन और उपकरण प्रणालियों (Control, Guidance and Instrumentation Systems) को विकसित करना था।

​बहु-विषयक नेतृत्व: उन्होंने भारत के उपग्रह प्रक्षेपण यान (Satellite Launch Vehicle) परियोजनाओं को एक कुशल और बहु-विषयक नेतृत्व प्रदान किया। उनके इसी तकनीकी मार्गदर्शन का परिणाम था कि भारत एएसएलवी (ASLV) और भारत के सबसे भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी (PSLV) का सफल विकास करने में सक्षम हो सका।

​स्वदेशी उद्योगों का विकास: डॉ. गुप्ता दूरदर्शी थे; वे जानते थे कि अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता तब तक संभव नहीं है जब तक देश का घरेलू उद्योग मजबूत न हो। इसलिए उन्होंने अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक पैकेज के स्वदेशी उत्पादन में भारतीय उद्योगों के साथ सहयोग को सफलतापूर्वक बढ़ावा दिया।

 

​नेतृत्व, अंतरिक्ष आयोग और विभिन्न परिषदों में स्थान

​डॉ. गुप्ता ने अंतरिक्ष विभाग के कई शीर्ष और महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया:

​वे वीएसएससी (VSSC) में ‘नियंत्रण, मार्गदर्शन और इंस्ट्रुमेंटेशन डिवीजन’ के प्रमुख, एवियोनिक्स के समूह निदेशक और एसोसिएट निदेशक रहे।

​सन १९८५ में वे वीएसएससी (VSSC) के निदेशक बने और सन १९९४ तक इस सर्वोच्च पद पर बने रहकर केंद्र का कुशल नेतृत्व किया।

​वे १९९३-१९९४ के दौरान भारत सरकार के अंतरिक्ष आयोग (Space Commission) के अत्यंत सम्मानित सदस्य भी रहे।

​वैज्ञानिक अकादमियों में फेलोशिप और सदस्यता:

​वे नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया और नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (भारत) के फेलो मनोनीत किए गए। वे इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स के भी सक्रिय सदस्य थे। वे ‘सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया’ के आजीवन सदस्य होने के साथ-साथ लगातार १२ वर्षों तक इसके अध्यक्ष रहे। इसके अलावा वे क्षेत्रीय कैंसर केंद्र (तिरुवनंतपुरम) की गवर्निंग काउंसिल और केरल हाईटेक इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशक मंडल जैसी कई सामाजिक व तकनीकी परिषदों के सम्मानित सदस्य रहे।

 

​सम्मान और पुरस्कार

​डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता की अद्वितीय वैज्ञानिक राष्ट्रसेवा के लिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से अलंकृत किया गया:

​राष्ट्रीय प्रणाली पुरस्कार (१९७५)

​श्री हरिओम आश्रम पेरिट डॉ. विक्रम साराभाई अनुसंधान पुरस्कार (१९७९)

​राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी पुरस्कार (१९८९)

​विद्युत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए वासविक (VASVIK) अनुसंधान पुरस्कार के अंतर्गत ‘आर्यभट्ट पुरस्कार’ (१९९०)

​द एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा लाइफ-टाइम कंट्रीब्यूशन अवार्ड (१९९६)

​अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टीट्यूट (USA) द्वारा लगातार दो वर्ष ‘मैन ऑफ द ईयर’ (१९९४, १९९५) नामांकित।

 

 

विक्रम अंबालाल साराभाई

 

 

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