पास बैठे हैं सब, पर कोई पास नहीं, धड़कनों में अब पहले जैसी प्यास...
HindiPoetry
भय प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी, बक्सर की इस पावन रज पर, छटा अलौकिक...
जली जो लकड़ियाँ बाहर, क्या भीतर कुछ खाक हुआ? मिटा जो चेहरे का अंतर,...
गीत: श्रद्धा का संवाद (स्थायी) ए पुजारी रे! काहे को तू पूजा करत है?...
न जाने वो कहाँ चली गयी बिन उसके जीवन सजा हो गयी ...
आज अयोध्या में नया भोर है, नए भोर का यह समारोह है। हर...
कितने झंझावात आते, सबको उसने झेला था। जितने बाधा, कंटक आते, सबसे उसने खेला...
यदि दुनिया गुलाबी होती, तो जगत सजीवन होता। मानव सादगी से भरे होते,...
हर बार क्यूं वो आजादी की बात करते हैं, बस पाए हुए का...