कुरुक्षेत्र: अंतर्द्वंद्व का महासमर गांधारी गम के सागर में डूबी, अपने ममता के...
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अंतर्द्वंद्व की परछाइयाँ मेरा लक्ष्य क्या पैसा है? मुझे पता नहीं! मेरा...
आजादी का निर्मोही खेल — विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’ हर बार क्यों वो...
रात की अलसाई मंजरी भोर के एक चुम्बन से, सकुचाई लालिमा लिए रवि के...
नगाड़े बज उठे दुंदुभी भी बज पड़ी है कुछ तो होने वाला है...
आओ कुछ बात करें अपने जहान की, हाँथ ही बात करेंगे दबे बेज़ुबान...
जिंदगी के टेढ़े-मेढ़े राहों से, एक शाम गुजरती है। उस शाम से सुबहा के...
प्रेम: एक निःस्वार्थ उपहार प्रिय स्वयं को सदा, प्रिय के ही लिए संवारता...
प्रेम: एक निःस्वार्थ उपहार प्रिय स्वयं को सदा, प्रिय के ही लिए संवारता...
वक्त का हिसाब कुछ लम्हे अपनी ही ज़िंदगी के, मैंने ज़िंदगी से चुरा...