जब कभी यह खिलते होंगे, चिड़ियन भी सब चहकते होंगे। बगियन तो बगियन...
कविता
जीवन की धमनियों में बहते प्रवाह को ही कविता कहते हैं।
लाख कठिन हो, मगर इस पर गुज़र जाऊँगा। हार कर अगर बैठा तो,...
विषय : स्वर्णपदक मैं जीतना चाहता हूँ, अपने सपनो के लिए, अपने अपनो...
मोबाइल मेरी परछाई नहीं, मेरे कल के काल का अंधेरा है। पीठ पर लादे...
मूल से मूल निकालोगे, तो क्या मूल्य तुम पाओगे। सत्य से सत्य को...
अगर बरसातें होती तो क्या बात होती अगर बरसातें… तो क्या… कुछ...
दोपहर की चाय पर काव्य पाठ: अकेलेपन की साथी क्या खास है इसमें...
बड़ी चाह थी कि जिंदगी लहरा कर चलती रहे, मगर हादसे ऐसे हुए...
अटल बिहारी वाजपेई भारत के तीन बार के प्रधानमन्त्री थे। वे पहले १६ मई...
न जाने वो कहाँ चली गयी बिन उसके जीवन सजा हो गयी ...